दो अगस्त 2018 को वह पूरे 100 वर्ष के हो जाते। शाकाहार, मानवता और शान्ति के दूत,आध्यात्मिक गुरु और साधु वासवानी मिशन के प्रमुख दादा जेपी वासवानी  का नाम भारत के प्रख्यात धर्मगुरुओं में शुमार है।इन्हें आधुनिक समय का योगी भी कहा जाता है जो देश-विदेश, दोनों के ही लोगों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे थे।ये एक ऐसे संत थे जो हर संवेदनशील जीव का सम्मान करते थे. वह दुनियाभर में शाकाहार और पशु अधिकारों को बढ़ावा देते थे। साथ ही अपने करिश्माई व्यक्तित्व के चलते दुनियाभर में जाने जाते थे। साधु वासवानी मिशन पुणे में स्थित एनजीओ है जिसके दुनिया भर में कई केंद्र हैं। वह गैर-सांप्रदायिक आध्यात्मिक गुरु थे हालांकि उनके समर्थकों में सिंधी समाज के लोग अधिक शामिल थे। दादा वासवानी 150 से ज्यादा किताबें भी लिख चुके हैं।

दादा वासवानी का जन्म  हैदराबाद शहर ( अब  पाकिस्तान में )  2 अगस्त 1918 को हुआ था। उनका पूरा नाम जशन पहलराज वासवानी था।दादा वासवानी के सात भाई-बहन थे, जिनमें तीन बहनें और चार भाई थे। पिता हैदराबाद में शिक्षक थे।उन्होंने फिजिक्स में पोस्टग्रैजुएशन किया। यहां तक कि उनकी थीसिस ‘द स्कैटरिंग ऑफ एक्स-रे बाय सॉलिड्स’ नोबल पुरस्कार विजेता सीवी रमन ने जांची थी जब दोनों के इस विषय पर विचार अलग थे। साधु वासवानी मिशन के प्रमुख एवं आध्यात्मिक गुरु दादा जेपी वासवानी का 99 साल की उम्र में 12 जुलाई 2018 को निधन हो गया था ।एजेन्सी। 

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