मुबारक साल गिरह। शिवाजी राव गायकवाड़ उर्फ रजनीकांत  की लोकप्रियता को शब्दों में नहीं आंका जा सकता। तमिल सुपर स्टार रजनीकांत की जिन्हें लोग भगवान की तरह पूजते हैं।अपने बेमिसाल और अनोखे अंदाज़की वजह से वह तमिल क्षेत्र का यह सुपरस्टार पूरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध हो गया। इसके बाद उन्होंने एक-एक करके तमिल और हिन्दी सिनेमा मे ऐसी यादगार फ़िल्में दीं जिसने दर्शकों के मस्तिष्क पर गहरी छाप
रजनीकांत का असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़  है। उनका जन्म 12 दिसंबर, 1950 को बैंगलोर में  मराठा परिवार में हुआ था। छोटी सी उम्र में ही उनकी माँ का देहांत हो गया, जिससे उनको बहुत तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने अपनी पढ़ाई आचार्य पाठशाला से शुरू की। बाद में उन्होंने उच्च शिक्षा बैंगलोर के रामकृष्ण मिशन से पूरा किया। 1981 में लाथा रंगराजन उनकी जीवनसंगिनी बनीं। उनकी दो बेटियां ऐश्वर्या और सौन्दर्या हैं।

रजनीकांत के दो छोटे भाई और एक बहन है। जब वह पांच साल के थे, उनकी माँ जीजाबाई का देहांत हो गया। उसके बाद उनके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। माँ की मौत के बाद अपनी बदली जीवनशैली में उन्हें अपने समुदाय में कुली का काम करना पड़ा। कुलीगिरी करते हुए शुरुआती शिक्षा उन्होंने आचार्य पाठशाला में पाई और उच्च शिक्षा रामकिशन मिशन में हासिल की। 1966 से 1973 के बीच उन्होंने चेन्नै से लेकर बेंगलुरु तक कई नौकरियां कीं। इसके बाद उन्हें बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस में बस कंडक्टर की नौकरी मिल गई। फिर शुरू हुई थियेटर की ज़िंदगी। उन्हें थियेटर में पहला मौका मशहूर नाट्य लेखक और निदेशक टोपी मुनिअप्पा ने दिया। महाभारत की कथा पर आधारित एक नाटक में उन्होंने उन्हें दुर्योधन का रोल दिया। उनका अभिनय सराहा गया। इस दौरान उनके सहकर्मी राज बहादुर ने उन्हें मद्रास फ़िल्म इंस्टिट्यूट जॉइन करने की सलाह दी। पढ़ाई का सारा खर्चा उन्होंने उठाया। नाटकों में अभिनय के दौरान मशहूर फ़िल्म निदेशक के. बालचंदर की नजर उन पर गई। बालचंदर ने उन्हें तमिल सीखने और बोलने की सलाह दी। रजनीकांत ने उनकी सलाह मान ली और बाद में तमिल उनके करियर में सहायक हुई। फ़िल्म इंस्टिट्यूट की ट्रेनिंग के बाद उनकी फ़िल्मी गाड़ी चल निकली।

संघर्ष के दिनों में रजनीकांत ने बेंगलुरू में मैसूर मशीनरी में भी कुछ दिन काम किया और चावल के बोरे ट्रकों में लादने का भी काम किया जिसके लिए उन्हें 10 पैसे प्रति बोरा मिलता था। उसके बाद उन्होंने एक परीक्षा दी और बेंगलूर परिवहन सेवा से बस कंडक्टर का लाइसेंस हासिल किया। रजनीकांत 19 मार्च, 1970 को बस चालक राजा बहादुर के साथ नौकरी पर लग गए। रजनीकांत ने फ़िल्मों की दुनिया में 1975 में प्रवेश किया तब वह महज 25 वर्ष के थे और उनकी पहली फ़िल्म ‘रागंगल’ थी। उनके अभिनय की वजह से इस फ़िल्म ने काफ़ी नाम कमाया और धीरे-धीरे इस कंडक्टर ने अपने सिगरेट पीने और चश्में पहनने की स्टाइल की वजह से तमिल फ़िल्मों में तूफान खड़ा कर दिया। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा उस समय रजनीकांत को गिने-चुने खलनायकों के रुप जाना जाता था।

रजनीकांत ने कैरियर की शुरुआत की तमिल फ़िल्म अपूर्व रागंगा से। जिसमें कमल हासन ने भी एक्टिंग की थी। इस फ़िल्म का निर्देशन किया था के बालचंदर ने। इस फ़िल्म में रजनी को बहुत ही छोटा सा किरदार निभाने को दिया गया था। इस फ़िल्म को बेस्ट तमिल फ़िल्म के लिए नॉमिनेट किया गया था और फ़िल्म ने उस अवॉर्ड को जीता भी। रजनीकांत निर्देशक बालचंदर को हमेशा अपना मेंटर मानते रहे। बॉलीवुड में रजनीकांत ने अंधा कानून फ़िल्म से एंट्री की थी। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन मेन लीड हीरो थे और उनके साथ थीं हेमा मालिनी। ये फ़िल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर काफ़ी कमाई की थी। उसके बाद रजनी ने हम, फ़िल्म की जो की काफ़ी हिट रही। रजनीकांत 2011 में ही रिलीज हुई शाहरुख खान की फ़िल्म रा.वन में  आए 2010 में रजनीकांत और ऐश्वर्या राय की फ़िल्म रोबोट रिलीज हुई थी जो की रजनी की तमिल फिक्शन फ़िल्म एंथिरन का हिन्दी वर्जन थी।

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