जयन्ती पर विशेष। एजेन्सी। जॉर्ज सिडनी अरुंडेल ( 1 दिसम्बर, 1878) का नाम भारत के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले अंग्रेज़ व्यक्तियों में गिना जाता है। एनी बेसेंट ने युवाओं की समुचित शिक्षा के लिए वाराणसी में जो ‘सेंट्रल हिंदू स्कूल’ की स्थापना की थी, जॉर्ज अरुंडेल उसी स्कूल में अध्यापक बन गए थे। वह भारत की स्वतंत्रता की भावना का पूरा सम्मान करते थे।जॉर्ज एस अरुंडेल अंग्रेज थे। भारत को उन्होंने अपना देश स्वीकार किया था। भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर भारतीयों का साथ दिया। मद्रास की प्रतिष्ठित भरतनाट्यम नृत्यांगना रुकमणी देवी से उन्होंने विवाह किया। जॉर्ज अरुंडेल सेंट्रल हिंदू कॉलेज बनारस में अंग्रेजी के अध्यापक थे और बाद में इसी कॉलेज के प्राचार्य बने। ये एनी बेसेंट के निकट सहयोगी थे और होमरूल लीग के संगठन सचिव थे। उन्होंने ही सर्वप्रथम राष्ट्रीय शिक्षा की वकालत की और राष्ट्रीय शिक्षा संवर्धन सोसायटी भी गठित की । वह मद्रास लेबर यूनियन के सभापति थे। थियोसोफिकल सोसायटी के अध्यक्ष पद को भी उन्होंने 1934 से 1945 तक सुशोभित किया था। बाल स्काउट आंदोलन के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। अरुंडेल एक प्रसिद्ध लेखक भी थे ।अपने जीवन के अंतिम दिनों में उन्होंने थियोसॉफी पर कई किताबें लिखीं। जॉर्ज सिडनी अरुंडेल का निधन 12 अगस्त, 1945 को हुआ। उनकी समाधि एनी बेसेंट की समाधि के निकट अडयार (मद्रास, वर्तमान चेन्नई) में है।
