एजेंसी। संजय गांधी का जन्म 14 दिसम्बर 1946 को नयी दिल्ली में हुआ। अपने बड़े भाई राजीव गांधी की तरह, संजय ने भी अपनी पढाई वेल्हम बॉयज स्कूल से पूरी की और बाद में देहरादून की दून स्कूल में वे पढने लगे। बाद उन्होंने ऑटोमोटिव इंजिनियर को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया और इंग्लैंड के क्रेवे में उन्होंने 3 साल तक अप्रेंटिसशिप भी की। स्पोर्ट कार में उन्हें काफी दिलचस्पी थी और साथ ही उन्होंने पायलट का लाइसेंस भी अर्जित कर रखा था। संजय अपनी माँ के काफी करीबी थे।

संजय गांधी का विवाह अपने से 10 साल छोटी मेनका आनंद से अक्टूबर 1974 को नयी दिल्ली में हुआ था। उनका एक बेटा वरुण गांधी हैं, जो संजय गांधी की मृत्यु के कुछ समय पहले ही पैदा हुए थे ।
प्लेन के हवा में क्रेश होने की वजह से 23 जून 1980 को नयी दिल्ली के सफ़दरजंग एअरपोर्ट के पास उनकी मृत्यु हो गयी। दिल्ली फ्लाइंग क्लब के नए एयरक्राफ्ट को वो उड़ा रहे थे और अपने ऑफिस से उपर एरोबटिक चालबाजी करते समय, वे एयरक्राफ्ट से अपना नियंत्रण खो बैठे और टकरा गए। उस समय प्लेन में केवल एक ही यात्री कप्तान सुभाष सक्सेना थे, जिनकी भी प्लेन क्रेश होने के बाद मृत्यु हो गयी थी।

संजय गांधी की मृत्यु के बाद उनकी माता को अपने दुसरे बेटे राजीव गांधी को भारतीय राजनीती में लाना पड़ा। लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, राजीव गांधी को ही भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया।

असल में देखा जाए तो विवादों से घिरे हुए होने के बावजूद संजय गांधी के लोकप्रिय राजनेता थे। भारत के राजनीतिक पटल पर एक ऐसे नेता का जन्म हुआ था जिसने अल्पायु में ही भारतीय राजनीती को अपनी सोच और कार्यो से प्रभावित कर रखा था। पहले से ही उनमे भारतीय राजनीती और देश के लिए कुछ अलग करने की चाहत थी और परदे के पीछे से भी उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए की वाद-विवादों से जैसा उनका घरेलु रिश्ता सा बन गया था। लेकिन विवादों से घिरे रहने के बावजूद जनमानस में उनकी लोकप्रियता कम नही हुई। उन्होंने ने जो योजनाए दी थी उन्हें अगर सही तरीके से लागू किया जाता तो निश्चित रूप से देश का कायाकल्प हो जाता।

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