संजोग वॉल्टर लखनऊ. लखनऊ के एक स्कूल के उप प्रधानचार्य को जेल जाना पड़ा है उन पर आरोप है की उन्होंने कक्षा 8 की छात्रा के साथ आपत्तिजऩक व्यवहार किया । गिरफ्तारी की तलवार तो स्कूल के प्रधानचार्य पर भी लटक रही है इस मामले को लेकर रोमन कैथोलिक एजुकेशन सोसाइटी सामने आ गयी है ,शनिवार को लखनऊ में रोमन कैथोलिक एजुकेशन सोसाइटी ने बैठक की जिसमें यह तय हुआ की पूरी सोसाइटी स्कूल के साथ है  क्योकि यह पूरा मामला ही गलत है साजि़शन ऐसा किया गया है स्कूल को बदनाम करने के लिए ,सोसाइटी स्कूल को हर क़ानूनी सहायता उपलब्ध कवायेगी
क्या है यह पूरा मामला
स्कूल के उप प्रधानचार्य पर 3 अगस्त को नाबालिग छात्रा से छेडख़ानी,पानी की बोतल में फिनायल मिलाने, प्रताडऩा का मामला दर्ज किया गया था। छात्रा का उत्पीडन करने के आरोप में स्कूल के उप प्रधानचार्य को विकासनगर पुलिस ने गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया था ।
कक्षा 8 की छात्रा ने उप प्रधानचार्य पर उससे अश्लीलता करने और प्रेम पत्र देकर परेशान करने का आरोप लगाया था। विकासनगर थाने में दर्ज ऍफ़ आई आर  को निरस्त करने के लिए स्कूल प्रबंधन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की गुरुवार को हाईकोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी थी। जिसके बाद उप प्रधानचार्य गिरफ्तारी की गई थी।
बरहाल इस मामले का लेकर दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए पीडि़त लड़की के दोषी जेल जाएँ अगर यह मामला रचित है तो स्कूल के साथ न्याय होना चाहिए। इस स्कूल के प्रधानाचार्य के लिए यह वेक अप कॉल है जरा अपने आप को देखें क्या लोगो से बात करने का यही तरीका होता है? आप किसी भी बात सुनते ही नहीं आप तो दोहरी भूमिका में हैं प्रधानाचार्य के साथ धर्म गुरु भी  हैं । आप के साथ रोमन कैथोलिक एजुकेशन सोसाइटी ज़रूर खड़ी है पर एक भी रोमन कैथोलिक और ईसाई आप के साथ नहीं खड़ा है। रही अभिभावाकों की बात तो उन्हें जाने दें उनके बच्चे वही पढऩेे है न ?

वक़्त के साथ बहुत कुछ बदल गया
ईशान वॉल्टर
वक़्त के साथ बहुत कुछ बदल गया है, अब वो न पढऩे वाले रहे ना वो पढ़ाने वाले, कभी ईसाई स्कूल बेहतरीन पढाई और डिसिप्लिन के लिए जाने जाते थे और अब ये स्कूल “स्टेटस सिम्बल ” हो गए हैं.
आज कल के नामचीन स्कूलों में अपने बच्चों को तालीम हासिल करना और ऊंची नस्ल के कुत्तो को पलना एक बेहद शान-औ-शौक़त की बात समझी जाती है. मसलन एक माँ को अपने 4 साल के बेटे को उसी नामचीन स्कूल में पढाना है जिसमे उसकी बहन का बेटा पढता है.
वहीँ बड़े अफसरान, सियासत दान और हस्तियों के बच्चे नामचीन स्कूल में पढ़ते है. जो स्कूल के मक़ाम को ऊपर तो उठता है लेकिन स्कूल को चलाने वालों को एक फितूर नुमा रुतबा देता है, जिस वजह से वो एक मामूली बच्चे और उसके माँ बाप को वो तवज्जो नही देते जिसकी उनको ज़रुरत होती है.
इस नाइंसाफी से निज़ाम-ए-तालीम भी बिगड़ता है और बच्चो के दिमाग उस तरह से नही बढ़ पता जिस तरह वो बढऩे लायक होता है.
एक मिसाल के तौर पर, अगर आप एक नौकरी पेशा मामूली शख्स है और आप अपनी कोई शिकायत करने स्कूल में बैठे चपरासी से लेकर प्रिंसिपल तक जाएँ तब भी आप की बात पर कोई खास,तवज्जो नही दिया जाता. ज़्यादा कोशिश करने पर दो-टूक जवाब मिलता है,आप का बच्चा यहाँ नही पढ़ सकता,दिक्कत है टीसी ले लीजिए
ये तो सिर्फ एक मिसाल है, हक़ीकत तो और भी बत्तर है, क्योंकि हक़ीकत में बड़े स्कूलों में प्रिंसिपल तक पहुचना ही टेढ़ी खीर है. कुछ ईसाई स्कूल के प्रिंसिपल पर ये इल्ज़ाम भी लगाया जाता है के वो मामूली शख्स की बात ही नही सुनते , लेकिन हक़ीक़त तो ये है के ज़्यादातर प्रिंसिपल किसी की भी नही सुनते। गौरतलब है किे इस रवैया की जड़ वही फितूर है जिसमे स्कूल को ये गुमा रहता है के जब बड़े आला अफसर और सियासत दान उनसे कुछ नही बोलते तो एक मामूली शख्स कौन होता है?

Leave a Reply

Your email address will not be published.