लखनऊ,नैचुरल जस्टिस (प्राकृतिक न्याय) और फन्डामैन्टल राइट्स (मूलभूत अधिकारों) के लिये एन्टीगनी का संघर्ष नाटक “इन्कलाबी शहज़ादी एन्टीगनी” में अत्यन्त प्रभावी रूप से देखने को मिला। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में वरिष्ठ नाट्य निर्देशक पुनीत अस्थाना के कुशल निर्देशन में एन्टीगनी को अपने बुनियादी हकों के लिये लड़ते हुए सशक्त रूप से पेश किया गया है। ज्यां ऑन्वही के मूल फ्रेंच नाटक एंटीगनी से अभिप्रेरित उर्दू ड्रामा “इंकलाबी शहजादी एंटनीगनी” का मंचन फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी की मदद से सृजन शक्ति वैल्फेयर सोसायटी की ओर से किया गया। इसका उर्दू तर्जुमा वसी खान ने किया है।

प्राचीन यूनान के थीव्स राज्य के राजा इडिपस के बाद, गद्दी के लिये, उसके दोनों शहज़ादों के बीच जंग होती है। उस जंग में दोनों मारे जातें हैं। तब राजा इडिपस का साला, क्रियान वहां का सुल्तान बनता है। वो एक राजकुमार को तो पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफना देता है, पर दूसरे को बाग़ी घोषित कर, उसे खुले मैदान में, चील कौवों के खाने के लिये छोड़ देता है। इसके साथ ही उसने मुनादी करवा देता है कि जो भी उसे दफनाने की कोशिश करेगा वो बाग़ी करार दिया जायेगा। इडिपस की छोटी लड़की एन्टीगनी को क्रियान की ये बात ठीक नहीं लगती और वह बग़ावती तेवर दिखाते हुए लाश को रात के अंधेरे में चुपके से जा कर दफना देती है। इससे क्रियान ख़फा हो जाता है और उसे मौत की सज़ा का ऐलान करता है। क्रियान का बेटा हेमन अपने पिता की इस नाइंसाफी के खिलाफ़ बग़ावत कर देता है और जनता की मदद से विद्रोह कर देता है। आक्रोशित जनता, हेमन के साथ मिल कर क्रियान को तख़त पर से उतार कर, एन्टीगनी को गद्दी पर बैठा देती है। ज़ुल्म करना, जितना बड़ा गुनाह है, ज़ुल्म सहना, उससे भी बड़ा गुनाह है। यही इस नाटक का मूल संदेश है।

न्याय के लिये संघर्ष करती शहज़ादी के रूप में सीमा मोदी ने विशेष रूप से प्रभावित किया। सत्ता पर मज़बूती से अपनी पकड़ बनाये रखने वाले ज़ालिम सुल्तान क्रियान की भूमिका में केशव पंडित ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को उससे नफरत करने के लिये मजबूर कर दिया। एन्टीगनी के समर्थन में अपने ज़ालिम पिता के खिलाफ आवाज़ बुलन्द करने में अली ख़ान ने अपने दमदार अभिनय का परिचय दिया। एन्टीगनी की बड़ी बहन इज़मैनी और दाई मां अर्चना शुक्ला ने भी चरित्रों की भावनाओं प्रभावी रूप से उकेरा। के.के.अग्रवाल (प्रस्तोता), रामेन्द्र लाल (कोरस), नवनीत मिश्र (जोनस), रवि तिवारी, शुभम शुक्ला (पहरेदारों) की भूमिकाओं में अपने चरित्रों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

नाटक को प्रभावी बनाने में आनन्द अस्थाना द्वारा डिज़ाइन्ड (परिकल्पित) शानदार सेट और मो.हफीज़ की प्रकाश योजना का भी विशेष रूप से योगदान रहा। कपिल तिलहरी की संगीत योजना और पारूल कांत व अर्चना शुक्ला की कास्ट्यूम परिकल्पना भी सराहनीय रही।

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