उत्तराखण्ड में भारी बहुमत से बनी सरकार ने एक ऐसा निर्देश जारी किया है जिससे समाचार जगत में हलचल मच गयी है। कहा जा रहा है कि उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार ने मीडिया पर लगाम लगा दी है अब यहां के मीडिया संस्थानों को सरकार बताएगी कि कौन सी खबर छपेगी और कौन सी नहीं। इसे कुछ बढ़ा-चढ़ाकर भी पेश किया जा रहा है। मीडिया को आपातकाल में बहुत कटु अनुभव मिला था। केन्द्र से लेकर राज्य सरकारें तक आलोचना से बचने के लिए मीडिया पर तरह-तरह से प्रतिबंध लगाती रही है। खुलकर तो कोई नहीं कहता है लेकिन इसका मतलब यही होता है कि कलम को पूरी आजादी नहीं है। इसीलिए गोपनीयता को लेकर उत्तराखण्ड सरकार के आदेश से भी बवाल मच गया और राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को सफाई देनी पड़ी। मुख्य सचिव की सफाई के बाद भी मीडिया में आशंका बरकरार है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत राज्य के बारे में जो विकास कार्य कर रहे हैं, मीडिया में उनको प्रमुखता भी दी जा रही है। इसलिए मीडिया में फैले इस भ्रम को कि अब सरकार बताएगी कि खबर क्या होगी, इसे दूर करना जरूरी है।
मामला उस समय उठा जब मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि अनधिकृत सूचना से गलत व्यू प्वांइट बन जाता है और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठता है। इसलिए शासन ने ऐसी व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया है जिसमें सूचना महानिदेशक के माध्यम से अहम घटना की जानकारी दी जाएगी अथवा प्रेस वक्तव्य जारी होंगे। मुख्य सचिव सचिवालय में एक प्रेस कान्फ्रेंस कर रहे थे। सचिवालय में सूचनाओं को लेकर रोक लगा दी गयी है अर्थात सचिवालय से कोई सूचना सीधे नहीं दी जा सकती इसी से विवाद पैदा हो गया था। मुख्य सचिव ने कहा कि शासन के एक आदेश के संबंध में भ्रम पैदा हुआ है। उत्तराखण्ड शासन अधिकृत और सही सूचना देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसीलिए यह व्यवस्था बनायी गयी है कि शासन में अगर कोई बड़ा फैसला होता तो इसकी सूचना कोई अन्य अधिकारी नहीं देगा बल्कि सूचना महानिदेशक ही देंगे। इसके साथ ही सरकारी प्रेस विज्ञप्तियां जारी करने की व्यवस्था यथावत रहेगी।
इसी के बाद पत्रकारों ने सवाल उठाया कि क्या ऐसा करके सरकार मीडिया पर अपना वर्चस्व नहीं बना रही है? इसके जवाब में मुख्य सचिव ने कहा कि जो सूचना सरकार मीडिया को देगी, उसकी जांच करने के लिए मीडिया को अधिकार है और मीडिया उस बारे में कोई तथ्य सामने लाएगी तो उस पर सरकार कार्रवाई भी करेगी। मुख्य सचिव ने सचिवालय से जानकारी पर प्रतिबंध को लेकर एक तर्क यह भी रखा है कि सचिवालय में आगुंतकों की आवाजाही से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज में बाधा पैदा होती है। साथ ही अनधिकृत सूचना से गलत ब्यू प्वांइट बन जाता है। मुख्य सचिव ने हालांकि यह नहीं बताया कि क्या हाल ही में सचिवालय में कोई ऐसा वाकया पैदा हुआ लेकिन उन्होंने संकेत जरूर दे दिया। मुख्य सचिव ने बताया कि शासन में महत्वपूर्ण विषयों के ऐसे आदेश जारी होते रहते हैं। कई बार अफसरों के तबादले हो जाते हैं या उनकी निगाह में आदेश नहीं आ पाते हैं और दोबारा आदेश जारी होने से उन्हें इसकी जानकारी हो पाती है। इसलिए सचिवालय के अधिकारियों से मिली जानकारी से भ्रम हो सकता है। पत्रकारों ने सवाल किया कि विभागीय सूचना के बारे में जब मीडिया प्रश्न करेगी तब क्या सूचना महानिदेशक उस विषय में पूरी सूचना दे सकेंगे? इस पर प्रमुख सचिव ने कहा कि महत्वपूर्ण विषयों की ब्रीफिंग के समय वरिष्ठ अफसर भी मौजूद रहेंगे। (हिफी)

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