पुण्य तिथि पर विशेष
जगत नारायण मुल्ला का जन्म 14 दिसम्बर,1864 को कश्मीर में हुआ था -मृत्यु- 11 दिसम्बर, 1938 को लखनऊ में हुईं थी। अपने समय में संयुक्त प्रान्त के मशहूर वकील थे। आपके  पिता पंडित काली सहाय मुल्ला संयुक्त प्रान्त में सरकारी सेवा में थे। जगत नारायण मुल्ला ने आगरा विश्वविद्यालय से क़ानून की परीक्षा उत्तीर्ण की और लखनऊ में वकालत करने लगे। शीघ्र ही उनकी गणना प्रसिद्ध वकीलों में होने लगी। अपने समय के प्रमुख व्यक्तियों, जैसे-पंडित मोतीलाल नेहरू, बाबू गंगा प्रसाद वर्मा, सी. वाई. चिन्तामणि, बिशन नारायण दर आदि से उनके घनिष्ठ सम्बन्ध थे। लखनऊ में आप के नाम पर एक रोड का नामकरण भी किया जिसे जगत नारायण रोड के नाम से जाना जाता है।

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उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’  14 दिसम्बर, 1910 – 19 जनवरी, 1996- उपन्यासकार, निबन्धकार, लेखक, कहानीकार हैं। अश्क जी ने आदर्शोन्मुख, कल्पनाप्रधान अथवा कोरी रोमानी रचनाएँ की।
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शंकरदास केसरीलाल ‘शैलेन्द्र’ 30 अगस्त, 1923 रावलपिंडी, (पाकिस्तान)14 दिसंबर, 1966 मुंबई हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे। ‘होठों पर सच्चाई रहती है, दिल में सफाई रहती है’, ‘मेरा जूता है जापानी,’ ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ जैसे दर्जनों यादगार फ़िल्मी गीतों के जनक शैलेंद्र ने महान् अभिनेता और फ़िल्म निर्माता राज कपूर के साथ बहुत काम किया। तीसरी कसम का निर्माण किया फिल्म असफल हो गयी शैलेन्द्र की मौत का कारण थी तीसरे कसम।

निर्मलजीत सिंह सेखों

फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों 17 जुलाई, 1943 –  14 दिसम्बर, 1971 परमवीर चक्र से सम्मानित है। इन्हें यह सम्मान 1971 में मरणोपरांत मिला। भारतीय वायु सेना से परमवीर चक्र के एकमात्र विजेता फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों ने 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ते हुए उस युद्ध में वीरगति पाई जिसमें भारत विजयी हुआ और पाकिस्तान से टूट कर उसका एक पूर्वी हिस्सा, बांग्लादेश के नाम से स्वतंत्र राष्ट्र बन गया। इस समय निर्मलजीत सिंह श्रीनगर वायु सेना के हवाई अड्डे पर मुस्तैदी से तैनात थे और नेट हवाई जहाजों पर अपने करिश्मे के लिए निर्मलजीत सिंह उस्ताद माने जाते थे।

संजय फ़िरोज गाँधी

संजय फ़िरोज गाँधी 14 दिसम्बर, 1946-23 जून, 1980- संजय गाँधी इंदिरा गाँधी के छोटे पुत्र थे। अल्पायु में ही एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गयी। मेनका गाँधी संजय गाँधी की पत्नी और वरुण गांधी संजय गाँधी के पुत्र है।
मुबारक साल गिरह
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श्याम बेनेगल- 14 दिसम्बर, 1934- मुख्यधारा से अलग फ़िल्में बनाने वाले हिन्दी सिनेमा के एक अग्रणी फ़िल्म निर्देशक हैं। सार्थक सिनेमा के प्रति प्रतिबद्ध फ़िल्मकार श्याम बेनेगल अपनी श्रेणी के किसी भी फ़िल्मकार की तुलना में अधिक सक्रिय रहे हैं। एक व्यावसायिक छायाकार के बेटे और प्रख्यात फ़िल्मकार गुरुदत्त के भतीजे श्याम बेनेगल ने बम्बई (वर्तमान मुम्बई) में एक निर्माता के रूप में अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत की। अपनी पहली फ़िल्म ‘अंकुर’ (1973) बनाने से पहले उन्होंने 900 से भी ज़्यादा विज्ञापन फ़िल्में और 11 कॉरपोरेट फ़िल्में बनाई थीं। ग्रामीण आन्ध्र प्रदेश की पृष्ठभूमि पर बनी यथार्थवादी फ़िल्म ‘अंकुर’ की व्यावसायिक सफलता से ‘भारतीय समान्तर सिनेमा आन्दोलन’ के युग का उदय हुआ, जिसकी शुरुआत मृणाल सेन की ‘भुवनशोम’ ने की थी।
विजय अमृतराज

विजय अमृतराज 14 दिसंबर 1953-पूर्व महान् टेनिस खिलाड़ी, खेल प्रस्तोता (कमेंट्रेटर) हैं। मैगी और रॉबर्ट अमृतराज के घर जन्मे विजय और उनके छोटे भाई आनंद और अशोक विश्व टेनिस में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी थे। इसके अतिरिक्त विजय ने जेम्स बॉन्ड की फ़िल्म ‘ओक्टॉपसी’ में अभिनय भी किया है।
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विश्वजीत देव चटर्जी – 14 दिसम्बर, 1936, कोलकाता- बंगाली और हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता हैं। अपने स्वाभाविक अभिनय और आकर्षक व्यक्तित्व के लिए प्रसिद्ध विश्वजीत देव चटर्जी ने बंगाली और हिन्दी फ़िल्मों के दर्शकों के दिलों में वर्षों तक राज किया है। कोलकाता में पले-बढ़े विश्वजीत के अभिनय सफर की शुरूआत बंगाली फ़िल्मों से हुई। उनके चाहने वालों ने उन्हें “किंग ऑफ़ रोमांस” की उपाधि दी। विश्वजीत पर फ़िल्माये गए गीतों की लोकप्रियता ने उनके फ़िल्मी कॅरिअर में चार-चांद लगाए। हिन्दी फ़िल्मों में विश्वजीत का सफर बेहद नपा-तुला रहा है।एजेंसी

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