स्वाधीनता के नायक पंडित कांशीराम-आजादी के परवाने एवं देश के पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम अब स्मृतियों में ही  रह गए हैं।  पंडित कांशीराम ग़दर पार्टी के प्रमुख नेता थे और देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे।पंडित कांशीराम का जन्म पंजाब के अंबाला ज़िले में हुआ था। मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने तार भेजने प्राप्त करने का काम सीखा और कुछ दिन अंबाला और दिल्ली में नौकरी की। इसके बाद वे अमेरिका चले गए।

यहीं से उनका क्रांतिकारी जीवन आरंभ होता है। आजीविका के लिए पंडित कांशीराम ने ठेकेदारी का काम किया। साथ ही वे ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ अमेरिका’ और ‘इंडियन इंडिपैंडेंट लीग’ में शामिल हो गए। उनके ऊपर लाला हरदयाल का बहुत प्रभाव पड़ा। वे संगठन भारत को अंग्रेजों की चुंगल से छुड़ाने के लिए बनाए गए थे। 1913 में पंडित कांशीराम ‘ग़दर पार्टी’ के कोषाध्यक्ष बन गए।

जिस समय यूरोप में प्रथम विश्वयुद्ध के बादल मंडरा रहे थे, ग़दर पार्टी ने निश्चय किया कि कुछ लोगों को अमेरिका से भारत वापस जाना चाहिए। वे वहां जाकर भारतीय सेना में अंग्रेजों के विरुद्ध भावनाएँ भड़काएँ। इसी योजना के अंतर्गत पंडित कांशीराम भी भारत आए।

उन्होंने सेना की कई छावनियों की यात्रा की और सैनिकों को अंग्रेजों की सत्ता उखाड़ फेंकने के लिए प्रेरित किया। कांशीराम और उनके साथियों ने अपने कार्य के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से मोगा का सरकारी कोषागार लूटने का असफल प्रयत्न भी किया। इसी सिलसिले में एक सब इंस्पेक्टर और एक जिलेदार इनकी गोलियों से मारे गए। कांशीराम और उनके साथी पकड़े गए, मुकदमा चला और 27 मार्च, 1915 को कांशीराम को फाँसी दे दी गई।

One thought on “पंडित कांशीराम”
  1. Wrong information. Pandit Kanshiram and Pahadi Gandhi Baba Kanshi Ram were different personalities.
    वह हमेशा कहते थे, ‘मैं कुण, कुण घराना मेरा, सारा हिंदोस्तान ए मेरा। भारत मा है मेरी माता, ओ जंजीरा जकड़ी ए। ओ अंग्रेजां पकड़ी ए, उसनू आजाद कराना ए’। written by Pahadi Gandhi Baba Kanshi Ram ji not pandit Kanshi Ram.

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