स्वप्निल संसार। प्रसिद्ध चरित्र एवं हास्य अभिनेता जानकीदास मेहरा की पहचान सिर्फ़ अभिनेता के तौर पर ही नहीं थी.जानकीदास अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्तित्व थे और उन्होनें ऐस-ऐसे कार्य किए थे जिन पर कोई भी गर्व कर सकता है। खेल के मैदान में चैम्पियन रहे है। देशभक्त के रूप में महात्मा-गांधी से प्रेरणा लेकर यूरोप में राष्ट्रीय ध्वज फहराने गौरव प्राप्त किया। जानकी दास ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित 1938 राष्ट्रमंडल खेलों में साइकिलिंग की चार स्पर्धाओं में हिस्सा लिया लेकिन वह कोई भी पदक नहीं जीत पाए। उन्होंने पुरुषों की 10 मील स्क्रेच रेस, 1000 मीटर टाइम ट्रायल, 1000 मीटर मैच स्प्रिंट पोजीशन और रोड रेस (100 किमी) स्पर्धाओं में भाग लिया था ।He has the honour of being the first Indian to have hoisted India’s national flag (pre-independence) at the World Sports Congress in Zurich.

राष्ट्रमंडल खेलों को तब ब्रिटिश एंपायर खेल कहा जाता था जानकी दास 1000 मीटर टाइम ट्रायल में तो 14 खिलाड़ियों में अंतिम स्थान पर रहे जबकि अन्य स्पर्धाओं में भी वह पदक के करीब नहीं पहुँच पाए। वह भले ही पदक जीतने में असफल रहे हों लेकिन साइकिलिंग में अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे।इन खेलों में मेजबान ऑस्ट्रेलिया का दबदबा देखने को मिला और वह 25 स्वर्ण, 19 रजत और 22 कांस्य पदक के साथ पदक तालिका में चोटी पर रहा। इंग्लैंड 15 स्वर्ण, इतने ही रजत और 10 काँस्य पदक के साथ दूसरे स्थान पर रहा जबकि कनाडा ने 13 स्वर्ण 16 रजत और 15 कांस्य के साथ तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया।

शुरुआत से ही खेलों में रुचि दिखाने वाले जानकीदास 1934 से 1942 के बीच साइकिलिंग में विश्व रिकार्ड बनाने वाले एकमात्र भारतीय रहे। इसके अलावा वह बर्लिन में 1936 ओलिम्पिक खेलों में अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के एकमात्र भारतीय सदस्य भी रहे।उनका फ़िल्मों का रिकॉर्ड भी अनूठा था। 1941 से 70 तक उन्होंने लगभग एक हज़ार फ़िल्मों में काम किया। जानकीदास की पहली फिल्म खज़ांची (1941) थी।जिसमें जानकीदास ने प्रमुख भूमिका निभाई।1953 की हिट फिल्म ‘दाएरा’ को गुरु दत्त ने निर्देशित किया था और जानकीदास ने मुख्य भूमिका निभाई थी, उनकी भूमिका ‘रामजान अली सौदागर’ के चरित्र के रूप में थी। चंदा और बिजली संजीव कुमार, पद्मिनी की सुपर हिट फिल्म थी जिसमें जानकी दास भी । जानकीदास की मशहूर फ़िल्मों में दौलत, डॉक्टर कोटनीस की अमर कहानी, खिलौना, लीडर, पड़ोसन और फ़ुटपाथ हैं। जानकी दास को कई अभिनेत्रियों के करियर को संवारने का श्रेय भी जाता है। उन्होंने 1947 में सोहराब मोदी की फिल्म ‘दौलत’ में मधुबाला को काम दिलाने में अहम भूमिका निभाई।उन्होंने मीना कुमारी को नानाभाई भट्ट की ‘हमारा घर’ और माला सिन्हा को किशोर शाहू की ‘हैमलेट’ में काम दिलाया। माला सिन्हा को हैमलेट में उनकी भूमिका के लिए काफी सराहा गया लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पर अधिक सफल नहीं रही।
जानकी दास लेखक भी थे और उन्होंने बॉलीवुड और अभिनय पर कई किताबें भी लिखी जिसमें ‘मिसएडवेंचर इन फिल्मलैंड’ और ‘एक्टिंग फार बिगनर्स’ शामिल हैं।1986 में उन्होंने फिल्म उद्योग के लिए अनशन की शुरुआत की और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के हस्तक्षेप के बाद अपना आंदोलन छोड़ दिया।जानकीदास कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता थे मई 1996 में उन्हें इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। 18 जून 2003 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई थी ।

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