स्वप्निल संसार। लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि समाजवादी सरकार में 22 दिसम्बर 2016 को जिस पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास हुआ था उसका फिर शिलान्यास प्रधानमंत्री से कराने की तैयारी चल रही हैं। समाजवादी सरकार में लखनऊ से बलिया बिहार बार्डर तक जाने वाले समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को गाजीपुर तक सीमित कर दिया गया है। भाजपा का यही चरित्र है कि अपनी कोई योजना देने के बजाय वह समाजवादी योजनाओं से ‘समाजवादी‘ शब्द हटाकर हमारी खड़ी फसल कटाने की साजिश करती रहती है।
समाजवादी सरकार में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए 50 फीसदी जमींन किसानों से उचित दर पर अधिकृत कर ली गई थी। किसान भाइयों ने इसमें सहयोग किया इसके लिए उन्हें धन्यवाद। मौजूदा भाजपा सरकार में इस परियोजना को बार-बार लटकाया गया है। यहां तक कि एक बार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेक्निकल बिड के नाम पर इसे निरस्त भी किया गया।
भाजपा सरकार पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनाने में जितने खेल कर सकती थी करने पर उतारू हैं। एक्सप्रेस-वे के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया होने पर पहले से करीब दोगुनी कम्पनियों को इसमें शामिल किया गया। अपने चेहेते वेण्डर को काम देने के लिए समाजवादी सरकार में 6 पैकेजेस में बनने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को 8 पैकेजेस में बनाने की योजना है।


समाजवादी सरकार की योजनाओं से चिढ़ना भाजपा की आदत में शुमार है। उसने जनहित की तमाम योजनाएं या तो रोक दी हैं या उनको लटकाने का काम किया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर बढ़ी हुई निर्माण लागत के साथ जीएसटी की भी मार पड़ी है। इस योजना के लिए 8.30 प्रतिशत की दर से पी.एन.बी. से 12 हजार करोड़ रूपए का कर्ज भी लिया गया है। इस पर लगने वाली जीएसटी से कीमत में वृद्धि के कारण जन साधारण को मंहगा टोल देना होगा।
कुछ ऐसा ही समाजवादी सरकार में शुरू हुई कानपुर मेट्रो परियोजना के साथ हुआ जिसकी निर्माण-लागत भाजपा द्वारा अतिरिक्त जीएसटी लगाने से कर 104 करोड़ रूपए बढ़ गई थी। कानपुर मेट्रो परियोजना पर लगी जीएसटी की दर से इसकी तुलना की जाए तो इसकी कीमत 01 हजार करोड रूपए से ज्यादा हो सकती है। जनधन की बर्बादी और विभागीय कुप्रबंधन का यह उदाहरण है।
भाजपा की प्राथमिकता में गांव-खेती-किसान कभी नहीं रहा है। वह कारपोरेट दुनिया में विचरना पंसद करती है। भाजपा सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का एलाइनमेंट बदल दिया है। इससे किसान भाइयों के लिए बनने वाली मंडियां नहीं बनेंगी। इससे दूध, फल, सब्जी उत्पादक किसान प्रभावित होंगे। गांवों में खुशहाली और रोजगार की संभावनाओं को भाजपा ने खत्म कर दिया हैं। किसान और जन सामान्य के हितों से खिलवाड़ करने वाली भाजपा को माफ करने वाले नहीं है। समय आने पर भाजपा को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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