अवतार सिंह संधू , जिन्हें सब पाश के नाम से जानते हैं पंजाबी कवि और क्रांतिकारी थे। 23 मार्च 1988 के दिन इस इंकलाबी पंजाबी कवि अवतार सिंह संधू उर्फ ‘पाश’ को खालिस्तानी उग्रवादियों ने गोली मार दी थी।पाश की कलम से डरे लोगों ने उनकी जान ले ली।पाश की कलम से डरे लोगों ने उनकी जान ले ली. उनकी कविताएं बेहद तल्ख और सार्थक राजनीतिक वक्तव्य हैं।अपनी कविताओं में वह लोहा खाने और बीवी को बहन कहने की बात करते हैं,और पेड़ों की लंबाई से वक्त मापने वाले लोगों को देश मानते हैं।उन्हें क्रांति का कवि माना गया।उनकी तुलना भगत सिंह और चंद्रशेखर से भी की जाती रही पर वे जिंदगी और इस दुनिया को बेपनाह प्यार करनेवाले कवि थे।अवतार सिंह संधू यानी हम सबके प्यारे कवि ‘पाश’ जिंदगी की धूल, धूप, ऊष्मा और नमी को अपनी सांसों में महसूस करने वाले और मिटटी की गंध से भी किसी प्रेमिका की देह-गंध की तरह बेपनाह इश्क करने वाले कवि थे।
पंजाब के जालंधर जिले में  9 सितम्बर 1950  में जन्में ‘पाश’ की कविताएं हमेशा से क्रांतिकारी रहीं। उनकी बातें न तो सरकार को पसंद आती थी न आतंकवादियों को। पाश की पहली कविता 1967 में छपी थी, इस वक्त वो कम्यूनिस्ट पार्टी से जुड़े थे। और इसी वक्त जेल से ही उन्होंने अपनी कविता संग्रह प्रकाशित होने के लिए भेजा जिसका नाम था ‘लौह कथा’। इस कविता संग्रह में कुल 36 कविताएं थी। इस संकलन के आने के बाद पाश पंजाबी कवियों की पहली पंक्ति में खड़े हो गए।  1971 में जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने तमाम कविताएं और नज़्में लिखीं। उन्होंने एक हाथ से लिखी हुई पत्रिका ‘हाक’ का संपादन भी किया। 21 साल की काव्य यात्रा में उन्होंने कई पुराने प्रतिमानों को तोड़ा और नई शैली को गढ़ा।पाश का कविता संग्रह ‘बीच का रास्ता नहीं होता’ पंजाबी भाषा की सबसे अधिक बिकने वाली किताब है लेकिन इसके बदले में उन्हें एक पाई भी नहीं मिली थी। 
पाश के लिखे में गांव की मिटटी की महक है. उनकी कविताओं में बैल, रोटियां, हुक्का, गुड़, चांदनी रात, बाल्टी में झागवाला फेनिल दूध, खेत खलिहान सब अपने पूरे वजूद में जीते-जागते मिलते हैं। उनका पूरा वजूद जिंदगी के इन्हीं बहुत छोटी-छोटी बिंदुओं से मिलकर बना था। पाश के बारे में एक सबसे खासबात यह भी है कि पंजाबी भाषा का कवि होने के बावजूद पूरी हिंदी पट्टी उन्हें अपना मानती है. अपनी भाषा का कवि. अपवाद के रूप में यदि अमृता प्रीतम की बात न की जाए तो इस भाषा के किसी और कवि को हिंदी में शायद ही इतनी प्रसिद्धि प्राप्त हुई हो।

सबसे खतरनाक होता है
– अवतार सिंह संधू ‘पाश’

मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती-पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती-गद्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती

बैठे-बिठाए पकड़े जाना, बुरा तो है-सहमी-सी चुप में जकड़े जाना, बुरा तो है-पर सबसे खतरनाक नहीं होता सुरेंद्र साम्भणी की फेस बुक वॉल से

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