2 जनवरी 2016 को तड़के सुबह 3:30 बजे पंजाब के पठानकोट में पठानकोट वायु सेना स्टेशन पर भारी मात्रा में असलहा बारूद से लैस आतंकवादियों ने आक्रमण कर दिया। संभवत: जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से  मुठभेड़ में 2 जवान शहीद हो गये  3 अन्य घायल सिपाहियों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। सभी आतंकवादी भी मारे गये।  किसी संभावित बचे हुए आतंकी के छुपे होने की स्थित में खोज अभियान 5 जनवरी को भी चल रहा था।

31 दिसम्बर 2015 की रात को चार लोगों ने दीना नगर में पंजाब पुलिस के कर्मचारी और गुरदासपुर के पुलिस अधीक्षक सलविन्दर सिंह की बहुपयोगी सरकारी गाडी को अगवा कर लिया। बाद में यह गाडी वायु सेना के अड्डे से 500 मी. दूर खड़ी मिली।  अपहरण से पहले आतंकियों ने एक अन्य नागरिक को भी घायल कर दिया। अपहर्ताओं द्वारा छोड़े जाने के बाद पंजाब पुलिस के पास रिपोर्ट लिखाने पहुंचे सलविन्दर सिंह की बताई गाडी के अपहरण की यह बात मानने से पुलिस ने इंकार कर दिया और अन्य बचे हुए अपहृत व्यक्ति मदन गोपाल को पुलिस ने अपहरण की बात कहने पर टॉर्चर किया। ऐसा समझा जाता है कि दो अन्य आतंकवादी सलविन्दर के अपहरण से पहले ही पठानकोट वायुसेना केंद्र में घुसने में कामयाब हो गये थे।

2 जनवरी 2016 की अल सुबह लगभग 3:30  पर भारतीय सेना की वर्दी पहने 6 बंदूकधारी उच्च सुरक्षा घेरा तोडते हुए पठानकोट वायु सेना केंद्र की सीमा में घुस गये। घुसपैठिए संभवत हमला करने से पहले मैदान में मौजूद बडी-बडी घास की ओट में छुपे हुए थे। वे सैनिको के रहने के लिये बने कालोनियों में तो घुस गये  लेकिन उस अति सुरक्षित क्षेत्र में नहीं घुस पाये जहाँ सेना के विमान और हथियार रखे हुए थे। एक उच्च पुलिस अधिकारी के अनुसार “ऐसा लगता है कि घुसपैठिए परिसर की दीवार लाँघकर अंदर कूद गये। हमलावर परिसर के अंदर 400  मीटर तक अंदर जंगली व घने पेडपौधों वाले रास्ते से होते हुए घुस गये थे जब उन्हें गरुड़ कमांडो बल के जवानों ने वायुसेना के लड़ाकू विमानों से 700 मीटर दूर रोक लिया। हमलावर अपने साथ ग्रेनेड, 51 मिमि मोर्टार, एके राइफले और जीपीएस उपकरण ले आये थे।

2 जनवरी को हुए इस शुरुआती मुठभेड में 4 हमलावर व तीन सुरक्षाकर्मी मारे गये। बाद में पूरे दिन गोलियों की आवाजे गूंजती रही जो और हमलावरों के मौजूद होने का इशारा कर रही थी। तीन अन्य सुरक्षाकर्मी, जो बमों को हटाते हुए घायल हो गये थे, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वो सभी 2 जनवरी 2016 को शहीद हो गये। 2 जनवरी को शहीद हुए जवानों में से एक राष्ट्रमंडल खेलों के निशानेबाजी विजेता डोगरा रेजिमेंट के सूबेदार फ़तेह सिंह थे जो  रक्षा सुरक्षा बल में कार्यरत थे।

हमले की खबर मिलते ही पठानकोट-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया गया। भारतीय गुप्तचर अधिकारियों के अनुसार हमलावर भारतीय सीमा में 31 दिसम्बर 2015 को बीस नदी के तटीय क्षेत्रों से होते हुए आये होंगे जो पाकिस्तान की सीमा में भी बहती है।  हमलावरों के दूरभाष अभिलेख और आपसी वार्तालाप से पता चला कि उनका मुख्य लक्ष्य वायुसेना के हेलिकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों को नष्ट करना था। 3 जनवरी 2016 की सुबह गोलियाँ चलने की आवाजें सुनी गईं, जिससे और अधिक हमलावरों के होने की आशंका बढ़ गई। एक मृत हमलावर के शरीर से बम हटाते वक्त हुए एक नये आईईडी धमाके से राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के तीन जवान घायल हो गये। उनमें से एक जवान ई. निरंजन का अस्पताल में निधन हो गया। दोपहर तक पता लगा की दो और हमलावर अभी भी परिसर में छुपे हुए हो सकते थे। बाहरी सैन्य मदद पहुँचने के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ़ तलाशी अभियान 4 जनवरी को भी चालू रखा था। पाँचवे आतंकी को उस दिन बाद में मार गिराया गया।

हमले के बाद देश की राजधानी दिल्ली को हाई अलर्ट पर रखा गया था। दिल्ली पुलिस की विशेष टुकड़ियों को जानकारी मिली  कि कश्मीर में स्थितआतंकवादी समूह – जैश-ए-मोहम्मद के दो आदमियों ने शहर में प्रवेश किया था। पूरे शहर भर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी, और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को 26 जनवरी को आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस परेड के देख-रेख में लगाया गया था।एजेन्सी 

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