रवि राय। आज 29 फरवरी है, साल का सबसे छोटा महीना । फरवरी में तीन साल तक 28 दिन और हर चौथे साल 29 दिन होते हैं।इस चौथे साल को लीप ईयर कहते हैं।ग्रिगोरियन कैलेंडर में यही व्यवस्था है । इस कैलेंडर की शुरुआत 442 साल पहले 15 अक्तूबर, 1582 को हुई । सवाल यह है कि हर चौथे साल की फरवरी में एक दिन बढ़ाने की क्या ज़रूरत पड़ गई ? तो आइए इस मुद्दे को आसान भाषा में समझें।
एक साल में 365 दिन माने गए क्योंकि माना गया कि सूर्य पृथ्वी का एक चक्कर 365 दिन में पूरा करता है। पर यह समय असल में 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 46 सेकंड है।
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अब सूर्य के चक्कर में 365 दिन के अतिरिक्त लगभग 6 घंटे है अतिरिक्त लगता है इसलिए चौथे साल तक संचित 6×4=24 घण्टे यानी एक दिन को 29 फरवरी के रूप में कैलेंडर में जोड़ लिया जाता है।
क्योंकि वास्तविक समय 6 घंटे से थोड़ा कम यानी कुल 674 सेकंड था इसलिए 4 साल बीतने तक 2696 सेकंड हिसाब में ज्यादा जमा हो जाते हैं, अर्थात इन 2696 सेकंड को हमारे 4 वर्षीय हिसाब में जुड़ना नहीं चाहिए था।
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100 वर्ष बीतने तक इन अतिरिक्त सेकंड्स की संख्या 67400 (2696×25) हो चुकी होती है, यानी अब एक दिन घटाने का समय है, इसलिए यह नियम सामने आता है कि शताब्दी का अंतिम वर्ष लीप इयर नहीं माना जाएगा, बेशक वो चाहें 4 से भाग दिया जा सकता हो।यानी अब मामला उलट जाता है।जहां हर चौथे साल एक दिन बढ़ाने की बात थी ,अब एक दिन घटाने की बात खड़ी हो जाती है।
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पर एक दिन में तो 86400 सेकंड होते हैं, तो कायदे से तो हमें 128 वर्षों में लीप इयर स्किप करना चाहिए, पर गणित सरल रहे इसलिए हमने यह काम 100 साल बाद ही कर दिया। इससे हर 100 साल में 86400 – 67400 = 19000 सेकंड ऐसे बच जाते हैं, जिन्हें हिसाब में जुड़ना चाहिए था, पर हमनें जोड़ा नहीं।
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400 साल के बाद इन बकाया रहे सेकंड की संख्या 76000 हो चुकी होती है, जो कि एक दिन में सेकंड की संख्या के करीब है, इसलिए अगला नियम यह सामने आता है कि अगर कोई संख्या 400 से भाग होती है तो उसमें एक अतिरिक्त दिन जुड़ेगा। इसीलिए, वर्ष 2000 लीप इयर था, पर 1700, 1800 अथवा 1900 नहीं।
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ये ग्रेगोरियन कैलेंडर की मुख्य बातें हैं, पर बात अभी पूरी नहीं हुई। जैसे कि मैंने ऊपर कहा कि एक दिन में 86400 सेकंड होते हैं। अब अगर हर 400 साल में 76000 सेकंड जोड़ने पर ही आप एक दिन पूरा मान लेंगे, तो 10400 सेकंड ऐसे रह जायेंगे, जो हिसाब में होने चाहियें, पर हैं नहीं, इसीलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर 3323 वर्ष में फिर से एक नया दिन जुड़ने की गुंजाईश शेष रह जाती है, इस हिसाब से वर्ष 4905 भी एक लीप इयर होगा।
सवाल यह उठता है कि क्या ऐसा शुद्ध कैलेंडर बनाया जा सकता है जिसमें कोई भी त्रुटि न हो? जी नहीं, चंद्रमा की ग्रेविटी से उत्पन्न टाइडल फोर्सेज के कारण पृथ्वी की घूर्णन गति मंद हो रही है, सूर्य-चाँद की सम्मिलित ग्रेविटी पृथ्वी को उसकी कक्षा में दूर धकेल रही है, पृथ्वी के घूर्णन में पुरस्सरण के कारण पृथ्वी के ऑर्बिट में निरंतर वेरिएशन आते रहते हैं, इस जैसे और भी बहुत सारे कारक हैं, जिनका असर दिन और वर्ष की लम्बाई पर पड़ता है। अतः एक आदर्श, स्थिर और अपरिवर्तनीय कैलेंडर बनाना संभव नहीं है।

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