राय बहादुर सर  सुंदर लाल  न्यायविद तथा शिक्षाशास्त्री थे। इनका जन्म 21 मई, 1857 जसपुर अब उत्तराखंड में हुआ था। 1876 में, उन्होंने इलाहाबाद में म्योर सेंट्रल कॉलेज में प्रवेश लिया, जिसके तत्कालीन प्रधानाचार्य ऑगस्टस स्पिलर हैरिसन थे। स्नातक करने के दौरान ही पंडित सुंदर लाल ने 1880 में उच्च न्यायालय की वकील की परीक्षा उत्तीर्ण की और 21 दिसंबर 1880 को वकील के रूप में नामांकित हुए। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत की।

उन्हें राय बहादुर की उपाधि 1905 में प्रदान की गई। वे 1907 में CIE, Companions of the Order of the Indian Empire नियुक्त किए गए। 1909 में उन्होंने कुछ महीनों के लिए लखनऊ में न्यायिक आयुक्त के न्यायालय की बेंच पर एक सीट स्वीकार किया और 1914 में संक्षिप्त अवधि के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया।

 वे  तीन बार वे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के और 1916 में काशीहिंदूविश्वविद्यालय के प्रथम वाइस चांसलर बने। इस विश्वविद्यालय की स्थापना में वे मालवीय जी के बड़े सहायक थे। सर सुंदर लाल के विचार इस संबंध में गोपाल कृष्ण गोखले से मिलते थे । सर सुंदर लाल का कांग्रेस से उसकी स्थापना के समय से ही संबंध था। मोतीलाल नेहरू, मालवीय जी, एनी बीसेंट आदि उनके मित्र और सहयोगी थे। कांग्रेस के इलाहाबाद अधिवेशन, 1910 की स्वागत समिति के अध्यक्ष थे। सर सुंदर लाल छात्रावास इलाहाबाद विश्व विद्यालय में है। सर सुन्दरलाल चिकित्सालय, बनारस में है। जसपुर अब उत्तराखंड मे सर सुंदर लाल के नाम पर कुछ भी नहीं है।

राय बहादुर सर  सुंदरलाल का निधन -13 फ़रवरी, 1918, इलाहाबाद अब प्रयागराज में हुआ था।एजेंसी। 

 

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