एजेंसी।चीन ने एशिया के क्षेत्र में इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए 2015 में ‘एशिया बैंक’ (AIIB) की स्थापना की।वर्ष 2013 में इस बैंक का प्रस्ताव चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पेश किया था।अब तक चीन ने बैंक को 100 बिलियन डॉलर का फंड दिया है।इस बैंक के नेतृत्व से चीन एशियाई देशों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चरल प्रोजेक्ट की फंडिग करके अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है।इस बैंक के जरिए चीन का उद्देश्य एशिया में रेल, रोड नेटवर्क और पॉवर ग्रिड की फंडिग करना है।
चीन की मीडिया में छपी खबर के अनुसार चीन सरकार पाकिस्तान में अपने इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोग्राम (CPEC) के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रेल और रोड नेटवर्क बनाना चाहता है।इस प्रोजेक्ट का भारत ने शुरू से ही विरोध किया है।हालांकि चीन सरकार कहती है कि कश्मीर पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान का आपसी मामला है इसलिए भारत को इस प्रोग्राम पर से अपनी आपत्ति हटा लेनी चाहिए।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की तुलना चीन सरकार ने ताइवान से की और CPEC प्रोग्राम पर भारत की आपत्ति हटाने की अपील करते हुए चीन सरकार ने कहा है कि इस मामले में भारत को चीन जैसा रुख अपनाना चाहिए।जिस प्रकार से चीन ने भारत और ताइवान के कारोबारी रिश्तों का हमेशा समर्थन किया है उसी प्रकार से भारत को भी चाहिए कि वह कश्मीर में चीन के कारोबारी रिश्तों का समर्थन करे।चीन का तर्क है कि भारत को आर्थिक गतिविधि और संप्रभुता को अलग अलग दृष्टि से देखना चाहिए। चीन ने कहा कि ताइवान में दूसरे देशों की आर्थिक गतिविधियों के बावजूद ताइवान की संप्रभुता चीन के पास है ठीक वैसे ही कश्मीर में किसी भी आर्थिक गतिविधि से क्षेत्र की संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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