सेहत से खिलवाड
पूरे देश में भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारत को अब डायबिटिक कैपिटल भी…
भीड़ से जुदा
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युवा होते लड़कों अथवा लड़कियों के जीवन में बड़ा परिवर्तन आता है। उनकी यह अवस्था काफी नाजुक होती है और…
-सरफ़राज़ ख़ान-भांग की वजह से दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जिससे मस्तिष्क को नुकसान हो सकता है.…
सरफ़राज़ ख़ान ।-नई दिल्ली. होली के दौरान बच्चों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले गुब्बारे खतरनाक साबित हो सकते हैं और…
एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर सेब में कई बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता होती है क्योंकि कोशिकाओं की सामान्य…
देखा जाय तो आसनों की रचना रोगों के उपचार के लिए नहीं की गयी है लेेकिन फिर भी रोगी को…
खूबसूरत मुलायम पैरों का सौंदर्य में उतना ही महत्व है जितना कि चेहरे का। चेहरे व शरीर के अन्य अंगों…
स्वप्निल संसार। अनुपमा फाउंडेशन एवं नीडल एन थ्रेड के संयुक्त प्रवाधान में शुक्रवार,को लखनऊ में महिला मानसिक स्वास्थ्य पर टॉक आयोजित किया गया। लगभग 12 मिलियन महिलायें हर साल अवसाद से पीड़ित हैं, महिलाओं को चिंता और दैहिक शिकायत के लिए और अवसाद, चिंता और आघात की पहचान, उपचार और रोकथाम से संबंधित विशेष विषयों पर यह टॉक शो रहा। मुख्य वक्ता मुख्य मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, बाबा भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ डॉ0 नेहा आनंद थी। वह पी एस वाइ केयर के साथ संस्थापक और निर्देशक हैं। इस टॉक शो में महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कई विषयों पर चर्चा हुई। ज्यादातर उपचार आम तौर पर ध्यान, बात, संज्ञानात्मक चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक चिकित्सा है। डॉ0 नेहा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य स्वास्थ्य और मानसिक बीमारी के महत्वपूर्ण निर्धारण में विकार और अक्षमता के महत्वपूर्ण बोझ से जुड़े हैं। महिलाओं को अवसाद, चिंता और दैहिक शिकायतों जैसी कुछ मानसिक बीमारियों से ग्रस्त होने की स्थिति में 2020 तक वैश्विक विकलांगता का दूसरा प्रमुख कारण माना जाने वालाअवसाद महिलाओं में दोगुना है। श्रीमती अनुपमा सिंह अध्यक्षा अनुपमा फाउण्डेशन ने कहा कि कई कारकों में जैविक, सौहार्द और आनुवांशिक जैसे महिलाओं में अवसाद का योगदान है। सामाजिक कारक, कार्य,पारिवारिक जिम्मेदारियों, भूमिकाएं और महिलाओं की अपेक्षाओं, यौन शोषण और गरीबी की दर में वृद्धि के कारण से तनाव सहित नैदानिक अवसाद पैदा होती है। यह महिलाओं कीस्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है और इसे सबसे ज्यादा देखभाल और सही तरह के उपचार से निपटना होगा। श्रीमती चारु श्रीवास्तव, उपाध्यक्षा ओरोंज कैसल ने महिला मानसिक स्वास्थ्य पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अवसाद,जैविक मस्तिष्क सिंड्रोम हैं, जिनमें से अधिकांश महिला इस से पीड़ित हैं। अंत में डॉ0 मिलन खन्ना, स्त्री रोग विशेषज्ञ और संस्थापक एवं निदेशक नीडल एन थ्रेड ने अतिथि और सहभागियों को धन्यवाद दिया और अपनी चिंता व्यक्त की कि महिलाओं कोशारीरिक और मानसिक रूप से अच्छी तरह से देखभाल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिर से महिलाएं मानसिक स्वास्थ्य पर एक टॉक शो का आयोजन किया जाएगा। यह टॉक शो लगभग जीवन के अलग-अलग आयाम की 60 …
जीवन चक्र का चौथा पड़ाव अर्थात बुढ़ापा कई तरह से दुखदाई होता है लेकिन यह नियति है जिसे रोका भी…