पहले इतने बुरे नहीं थे तुम
स्मृति शेष । भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। भवानी प्रसाद मिश्र दूसरे तार-सप्तक के …
चलो दिलदार चलो
चलो दिलदार चलो चांद के पार चलो हम हैं तैयार चलो…’पाकीज़ा फ़िल्म के इस मशहूर गीत को क़लमबंद करने वाले…
रत्ती की उलझी सी जिन्दगी
नाइश हसन ।1928 में जब जिन्ना को सर की उपाधि देने की बात चली थी तो रत्ती ने यहाँ तक कहा…
कैसे हुआ स्टेथस्कोप का आविष्कार
जयंती पर विशेष- मेडिकल उपकरणों में स्टेथस्कोप की अपनी खास पहचान है। इसे बच्चे तक पहचानते हैं। इसका आविष्कार करने…
डर्मेटोमायोसिटिस थी
सुहानी भटनागर (14 जून 2004 ) ने छोटी उम्र में विभिन्न टेलीविज़न विज्ञापनों के साथ-साथ साहित्य संग्रहों और फिल्मों में…
अल्गोरिथम : और हमारी वैचारिक ताक़त
इसे यूँ कहना ही शायद उचित रहेगा कि अब से पहले वाले दौर में हम किस तरह से स्वाभाविक रूप…
कहां हैं शोमा आनंद ?
मुबारक साल गिरह स्वप्निल संसार। ”मुझे पीने का शौक नहीं…पीती हूं गम भूलाने को”, ये गाना साल 1983 में आई…
महान् खगोल वैज्ञानिक थे
स्मृति शेष । मेघनाद साहा एस्ट्रोफिजिसिस्ट् थे। वे साहा समीकरण के प्रतिपादन के लिये प्रसिद्ध हैं। यह समीकरण तारों में…
‘मेरे मरने की ख़बर छपे तो मुझे अख़बार भेजना मत भूलना
जयंती पर विशेष एक लफ्ज़ है – हरफ़न मौला. इस एक लफ्ज़ को अगर किसी नाम में बदला जाए तो एक…
भारतीय सिनेमा के पितामह थे
दादासाहब फाल्के को भारतीय सिनेमा के पितामह के रूप में जाना जाता है। धुंडिराज गोविन्द फालके उपाख्य दादासाहब फालके जिन्हें…