राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त
पुण्य तिथि पर विशेष-स्वप्निल संसार। प्राण न पागल हो तुम यों, पृथ्वी पर वह प्रेम कहाँ..मोहमयी छलना भर है, भटको…
भीड़ से जुदा
पुण्य तिथि पर विशेष-स्वप्निल संसार। प्राण न पागल हो तुम यों, पृथ्वी पर वह प्रेम कहाँ..मोहमयी छलना भर है, भटको…