मशहूर संगीतकार खय्याम का जन्म 18 फरवरी  1927 को हुआ था और उनका निधन 19 अगस्त, 2019 में। उमराव जान, कभी-कभी, दर्द, नूरी, रजिया सुल्तान, त्रिशूल, बाजार फिल्मों में अमर संगीत देने वाले खय्याम को भारत सरकार ने पद्म भूषण सम्मान से भी सम्मानित किया था।

खय्याम का पूरा नाम मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी था लेकिन फिल्म जगत में उन्हें खय्याम के नाम से प्रसिद्धी मिली थी। उन्‍हें ‘कभी-कभी’ और ‘उमराव जान’ जैसी फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। खय्याम ने अपने करियर की शुरुआत 1947 में की थी। 1961 में आई फिल्म शोला और शबनम में संगीत देकर खय्याम को पहचान मिलनी शुरू हुई। आखिरी खत, कभी-कभी, त्रिशूल, नूरी, बाजार, उमराव जान और यात्रा जैसी फिल्मों में धुनें दीं।

मोहम्मद जहूर खय्याम ने संगीत की दुनिया में अपना सफर 17 साल की उम्र में लुधियाना से शुरू किया था। खय्याम की पहली इच्छा एक्टर बनने की थी।  बचपन से ही चोरी-छिपे फिल्में देखने का शौक था करीब दस-ग्यारह साल की उम्र में  लुधियाना से चलकर अपने चाचा के पास दिल्ली आ गये दिल्ली में ही पढ़ाई-लिखाई शुरू कीलेकिन मन फिल्मों में लगता था-अभिनय करना चाहते थे

करीब पांच साल तक खय्याम पं. अमरनाथ की टीम का हिस्सा रहे यहीं उनकी मुलाकात पं. अमरनाथ के दोनों छोटे भाई संगीतकार हुस्नलाल-भगतराम से हुईहुस्नलाल-भगतराम को हिंदी फिल्मों की पहली संगीतकार जोड़ी कहा जाता हैचालीस के दशक के जमाने में इन तीनों भाइयों की कामयाबी आसमान चूमती थी खय्याम इन तीनों भाइयों के बीच रहते और संगीत की बारीकियां सीखते

खय्याम करीब पंद्रह-सोलह साल के हो गए।  पं. अमरनाथ ने कहा- पिछले पांच-छह साल से तुम हमारे पास सीख रहे हो-अब इंडस्ट्री में लोगों के पास जाओ और अपने बारे में बताओ उन दिनों पाकिस्तान नहीं बना था. खय्याम की मुलाकात लाहौर के चर्चित संगीतकार जी ए चिश्ती से हुई उन्होंने पं. अमरनाथ का नाम सुनते ही खय्याम को अपना असिस्टेंट बना लिया यहां से खय्याम को बतौर असिस्टेंट संगीतकार के तौर पर काम मिलने लगा लेकिन मन अब भी एक्टिंग में ही लगा रहा

अब तक खय्याम बिना मेहनताना लिये ही काम कर रहे थे. उम्र ऐसी थी कि कोई बतौर पेशेवर उन्हें अपने साथ नहीं रखता था। लिहाजा वो कई सालों तक बिना पैसे लिये काम करते हुए सीखते गयेउस वक्त जी ए चिश्ती बी. आर. चोपड़ा की एक फिल्म के लिए काम कर रहे थे- जब उन्हें पता चला कि यह लड़का बिना पैसे लिये काम कर रहा है तो अचंभित हुए और उनकी पहली तनख्वाह तय हुई- एक सौ पच्चीस रुपये.

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