धर्मयुग को पत्रकारिता का आकाश छूती ऊँचाइयों तक पहुंचा कर सत्ताईस वर्षों तक लगातार पूरी एकाग्रता के साथ काम करने के उपरांत 1987 में अवकाश ग्रहण कर लिया।
1989 में ह्रदय रोग से गंभीर रूप से बीमार हो गये। बम्बई अस्पताल के डॉ. बोर्जेस के अथक प्रयासों और गहन चिकित्सा के बाद बच तो गये किंतु स्वास्थ्य फिर कभी पूरी तरह सुधरा नहीं। कई प्रकार के तनावों को झेलते हुए सत्ताईस बरस की रात और दिन की बेइंतिहा दिमाग़ी मेहनत से शरीर काफ़ी अशक्त हो चुका था। वे केवल अद्भुत इच्छा शक्ति के साथ काम करते रहे थे। अंतत: 4 सितंबर 1997 को नींद में ही मृत्यु को वरण कर लिया।

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