दिल्ली कैंट इलाके में 16 अप्रैल को हुयी 75 लाख की लूट का मामला फर्जी निकला। इसमें लूट की कहानी गढ़ने वाले दोनों लोग नौकर ही निकले। ये दोनों पिछले दस सालों से एक ही मालिक के यहाँ नौकरी कर रहे थे।
जॉइंट सीपी दीपेंद्र पाठक ने बताया कि आरोपियों की पहचान अनुज जैन और कुलदीप राज वर्मा के तौर पर हुयी है। ये दोनों लोग निशांत नाम के व्यक्ति के लिए काम करते थे।वारदात वाले दिन अनुज, ग्रेटर कैलाश से पैसा लेकर कीर्तिनगर के लिए निकला था। इस दौरान उसने पुलिस को करीब 10:30 बजे रात में सूचना दी थी की चार लड़कों ने धौलाकुआं से नारायणा की तरफ एक कार में लूट लिया है। जबकि असल में उसने यह पैसा अपने  साथ काम करने वाले कुलदीप को दे दिया था।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन लोगों ने 5 महीने पहले सावधान इंडिया देखकर इस तरह की हरकत करने की सोची थी । इन दोनों ने तय किया था कि जिस दिन निशांत के यहाँ बड़ा पैसा आएगा, वह इस कारनामे को अंजाम देंगे।इसके बाद तय प्लान के तहत उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों को पकड़ने के लिए एएटीएस इंस्पेक्टर राजकुमार, मनोज भाटिया, सुब्रतो पार्क चौकी इंचार्ज रामप्रताप की टीम बनाई गई थी।हालांकि जब इन लोगों ने अनुज से पूछताछ की तो वह टूट गया। पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि पेशे से फाइनेंसर निशांत के पास यह पैसा आया कहाँ से, हालांकि जॉइंट सीपी ने पैसा हवाला का होने से इंकार कर दिया है।

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