पुण्य तिथि पर विशेष । स्वप्निल संसार ।
उस्ताद अलाउद्दीन खाँ सरोद वादक थे साथ ही अन्य वाद्य यंत्रों को बजाने में भी पारंगत थे। वह अतुलनीय संगीतकार और बीसवीं सदी के सबसे महान संगीत शिक्षकों में माने जाते हैं। 1935 में पंडित उदय शंकर के बैले समूह के साथ खाँ साहब ने यूरोप का दौरा किया और इसके बाद काफी लंबे समय तक अल्मोड़ा मे ‘उदय शंकर इण्डिया कल्चर सेंटर’ से भी जुड़े रहे। अपने जीनन काल में उन्होंने कई रागों की रचना की और विश्व संगीत जगत में विख्यात मैहर घराने की नींव रखी। उनकी सबसे खास रिकॉर्डिंग्स में से ऑल इण्डिया रेडियो के साथ 1950-60 के दशक में की गई उनकी रिकॉर्डिंग सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं।

अलाउद्दीन खाँ साहब मशहूर सरोद वादक अली अकबर खाँ और अन्नपूर्णा देवी के पिता हैं, साथ ही राजा हुसैन खाँ के चाचा भी। बाबा अलाउद्दीन खाँ पंडित रवि शंकर, निखिल बनर्जी, पन्नालाल घोष, वसंत राय, बहादुर राय आदि सफल संगीतकारों के गुरु भी रहे। उन्होंने स्वयं गोपाल चंद्र बनर्जी, लोलो और मुन्ने खाँ संगीत के महारथियों से संगीत की दीक्षा ली। उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद मशहूर वीणावादक रामपुर के वज़ीर खाँ साहब से भी संगीत के गुर सीखे।

उसताद अलाउद्दीन खान को कला के क्षेत्र में 1958 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें 1954 में उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकादमी ने अपने सबसे बड़े सम्मान ‘संगीत नाट्य अकादमी फैलोशिप ‘ से नवाज़ा।

अलाउद्दीन खाँ का जन्म बंगाल (आज का बांग्लादेश) के ब्राम्हनबरिया ज़िले के छोटे से गांव शिबपुर में 1862 में हुआ था। उनके पिता का नाम सबदार हुसैन खाँ था। अलाउद्दीन के बड़े भाई फ़कीर आफ़ताबुद्दीन ने उन्हें सबसे पहले संगीत से रुबरु करवाया। उस्ताद अलाउद्दीन खाँ का निधन 6 सितम्बर 1972 को हुआ था।

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