सुनीति कुमार चटर्जी

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– 25 नवम्बर, 1890, , पश्चिम बंगाल- 29 मई, 1977 कोलकाता को  प्रसिद्ध भाषाविद, साहित्यकार तथा विद्याशास्त्री के रुप में जाना जाता है। वे एक लोकप्रिय कला प्रेमी भी थे। सुनीति कुमार की संस्कृत योग्यता को देखते हुए उन्हें ‘जुबली शोध पुरस्कार’ दिया गया था। उन्होंने विदेशों में भी भारतीय कला और संस्कृति पर अनेक व्याख्यान दिए थे। रवीन्द्रनाथ टैगोर का सान्निध्य भी इन्हें प्राप्त था। सुनीति कुमार चटर्जी ग्रीक, इतालवी, लैटिन, फ़्रेंच, अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़ारसी, संस्कृत तथा दर्जनों आधुनिक भारतीय भाषाओं के ज्ञाता थे।
देवकी कुमार बोस

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– 25 नवम्बर, 1898, पश्चिम बंगाल 11 नवम्बर, 1971, कोलकाता ‘मूक युग’ के बाद भारतीय सिनेमा के इतिहास में आये थियेटर्स युग के बेहद कल्पनाशील फ़िल्म निर्देशक थे। वे ध्वनि और संगीत के अद्भुत जानकार थे। यही कारण है कि उनके द्वारा निर्देशित सभी फ़िल्मों में संगीत का माधुर्य बिखरा पड़ा है। उनकी अधिकतर फ़िल्मों में राय चन्द बोराल ने संगीत दिया था। देवकी बोस ही वह पहले बंगाली फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्होंने ‘भारतीय शास्त्रीय संगीत’ के साथ ‘रवीन्द्र संगीत’ को मिला कर फ़िल्मों में एक अद्भुत ध्वनि माधुर्य पैदा किया। यदि देवकी बोस ‘न्यू थियेटर्स’ से न जुड़ते तो संभव था कि ‘न्यू थियेटर्स’ की वह प्रसिद्धि नहीं होती जो आज है।
टी. एल. वासवानी

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– 25 नवंबर, 1879, हैदराबाद- 16 जनवरी, 1966, पूना, प्रसिद्ध लेखक, शिक्षाविद और भारतीय संस्कृति के प्रचारक थे। वासवानी ने देश की स्वाधीनता के संग्राम का समर्थन किया था। इस विषय में गांधी जी के पत्र ‘यंग इंडिया’ में उन्होंने कई लेख लिखे थे। भारत सरकार ने टी. एल. वासवानी की स्मृति में डाक टिकट भी निकाला था।
पुण्य तिथि
सितारा देवी

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– 8 नवम्बर, 1920, कोलकाता- 25 नवम्बर, 2014, मुम्बई, प्रसिद्ध नृत्यांगना थीं। उनका नाम कथक नृत्यांगना के रूप में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे जिस मुकाम पर थीं, वहाँ तक पहुँचने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया था। बहुत कम लोग यह जानते हैं कि मात्र सोलह साल की उम्र में उनका नृत्य देखकर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें “कथक क्वीन” के खिताब से सम्मानित किया था। आज भी लोग इसी खिताब से उनका परिचय कराते हैं। इसके अतिरिक्त सितारा देवी के खाते में ‘पद्मश्री’ और ‘कालिदास सम्मान’ भी हैं, जो कथक के प्रति उनकी सच्ची लगन और मेहनत को दर्शाते हैं।
चन्दूलाल जयसिंह भाई शाह-

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 13 अप्रैल, 1898, गुजरात- 25 नवम्बर, 1975, मुंबई, हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक थे। उन्हें भारतीय सिने इतिहास की प्रसिद्ध हस्तियों में गिना जाता है। वह एक प्रकार से संयोगवश ही फ़िल्मों में आये थे। उन्होंने अपने दौर के सबसे कुशल व्यावसायिक फ़िल्मकार बनकर सबको चमत्कृत कर दिया था। संयोग से ही सही, लेकिन इस क्षेत्र में आने के बाद चन्दूलाल शाह ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह इस क्षेत्र में नहीं आये होते तो हिन्दी के व्यावसायिक सिनेमा का नुकसान ही होता, क्योंकि आज हिन्दी का व्यावसायिक सिनेमा जिस तरह का है, उसमें एक बड़ी भूमिका चन्दूलाल शाह जैसे प्रयोगवादी फ़िल्मकारों की भी रही है।
राय चन्द बोराल

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19 अक्टूबर, 1903, कलकत्ता 25 नवम्बर, 1981 हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार थे। उन्हें भारतीय सिनेमा में ‘पार्श्वगायन’ की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है। इसके साथ ही बोराल जी को पहली संगीतमय कार्टून फ़िल्म बनाने का भी श्रेय प्राप्त है। उनके द्वारा निर्मित तीन कार्टून कथाचित्रों में ‘भुलेर शेषे’, ‘लाख टाका’ एवं ‘भोला मास्टर’ हैं। आर. सी. बोराल को कार्टून फ़िल्म बनाने की प्रेरणा मशहूर हास्य कलाकार चार्ली चैपलिन की फ़िल्म ‘ए सिटी लाइट्स’ से मिली थी, जिसे उन्होंने 40 बार देखा था। सुप्रसिद्ध गायक कुंदनलाल सहगल की प्रतिभा को तराशने, निखारने एवं उसे भारत की जनता से रू-ब-रू करवाने का श्रेय भी आर. सी. बोराल को ही जाता है। हिन्दी फ़िल्मों में दिये हुए विशिष्ट योगदान के लिए आर. सी. बोराल को वर्ष 1978 में ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ और 1979 में ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था।
मेजर रामास्वामी परमेस्वरन 

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13 सितम्बर, 1946- 25 नवम्बर, 1987 परमवीर चक्र से सम्मानित थे। उन्हें यह सम्मान  1987 में मरणोपरांत मिला। भारत की सेनाओं ने हमेशा युद्ध के लिए हथियार नहीं उठाए बल्कि ऐसा भी मौका आया, जब उसकी भूमिका विश्व स्तर पर शांति बनाए रखने की रही। श्रीलंका में ऐसे ही उदाहरण के साथ भारत का नाम जुड़ा हुआ है। विस्तृत इतिहास के बीच एक प्रसंग ‘ऑपरेशन पवन’ का है, जो 1987 से 1990 तक श्रीलंका में चला, जिसमें भारतीय सेना के वीर मेजर रामास्वामी परमेस्वरन् ने शांति विरोधी तत्वों के हाथों अपने प्राण गँवाए और इसके लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा परमवीर चक्र प्रदान किया गया।
यशवंतराव बलवंतराव चह्वाण 

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– 12 मार्च, 1913 – 25 नवंबर, 1984 देश के पाँचवे उपप्रधानमंत्री और महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री थे। एक समय  देश के प्रमुख राजनेता और केन्द्र सरकार के महत्त्वपूर्ण विभागों के सफल मंत्री थे। यशवंतराव चह्वाण एक मज़बूत कांग्रेस नेता, स्वतंत्रता सेनानी, सहकारी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक थे। ये ‘आम आदमी के नेता’ के रूप में लोकप्रिय थे। यशवंतराव चह्वाण ने अपने भाषणों और लेखों में दृढ़ता से समाजवादी लोकतंत्र की वकालत की और महाराष्ट्र में किसानों की बेहतरी के लिए सहकारी समितियों को स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुबारक सालगिरह

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झूलन निशित गोस्वामी – 25 नवम्बर, 1982, नादिया, पश्चिम बंगाल) देश की प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर हैं। उन्हें ‘नादिया एक्सप्रेस’ के नाम से भी जाना जाता है। अपनी शानदार गेंदबाजी से वे कई बार भारत को जीत दिला चुकी हैं। झूलन गोस्वामी अंतरराष्ट्रीय एक दिवसीय क्रिकेट मैच में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाली महिला क्रिकेटर हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की कैथरीन फिट्जपैट्रिक का एक दशक से चला आ रहा रिकॉर्ड तोड़ कर यह उपलब्धी अपने नाम की है। वे मिताली राज से पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान भी कर चुकी हैं।

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