बॉलीवुड का एक जाना-माना नाम है आमिर खान। गिनी-चुनी फिल्में देने वाले लेकिन हर फिल्म की सफलता की गारंटी। अभी पिछली फिल्म दंगल भी इस कसौटी पर खरी उतरी है। आमिर की फिल्मे सिर्फ बाक्स आफिस पर ही कमायी नहीं करती बल्कि जनता के बीच एक सार्थक बहस भी छोड़ जाती हैं। हम बात चाहे ‘तारे जमीं परÓ की कहें अथवा थ्री इडियट की सभी फिल्मों ने एक संदेश दिया कि हमें जीवन में कब, कैसे फैसले लेने चाहिए। इन्हीं सब बातों ने आमिर खान को मिस्टर परफेक्सनिस्ट बना दिया है लेकिन उन्होंने बचपन से लेकर बड़े होने तक जिस प्रकार के संघर्षों का सामना किया है, उनसे भी उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा मिली है। सिनेमा उनको पैतृक
धरोहर के रूप में मिला है लेकिन हालात कभी-कभी ऐसे आते थे कि आमिर को अपने स्कूल की फीस भरने में भी कठिनाई होती थी। आज तो उन्हें नेम और फेम दोनों मिला हुआ है।
आमिर का जन्म १४ मार्च १९६५ को मुंबई में हुआ था। उनका परिवार काफी पहले से ही बॉलीवुड से सम्बंधित था। उनके पिता ताहिर हुसैन हिंदी फिल्मों के निर्माता थे तो उनके चाचा फिल्मों के र्पसिद्ध अभिनेता, निर्माता और निर्देशक थे। उनकी माता का नाम जीनत हुसैन था। आमिर र्पसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद के वंशज हैं। इनकी शुरुआती पढ़ाई जेबी पेटिट स्कूल से हुई और फिर बॉम्बे स्कोटिश स्कूल से। आगे की पढ़ाई मुंबई के ही नरसी मोंजी कॉलेज से हुई। आमिर की रुचि पढ़ाई से अधिक टेनिस में रही यहाँ तक कि उन्होंने राज्य स्तर पर टेनिस भी खेला।
बचपन में आमिर के माता पिता की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी क्योंकि उनके पिता की फिल्में असफल हो रही थीं, जिस कारण आमिर के स्कूल की फीस भी मुश्किल से ही निकल पाती थी। उनके माता पिता अपनी फिल्मों के ये हालात देख कर चाहते थे कि आमिर बड़े होकर डॉक्टर या इंजीनियर बनें लेकिन आमिर हमेशा से ही फिल्म इंडस्ट्री में जाना चाहते थे यहाँ तक कि उन्होंने घर पर बताये बिना थिएटर करना भी शुरू कर दिया था और कुछ नाटकों में हिस्सा भी लिया।
हाई स्कूल के बाद आमिर ने पढ़ाई छोड़ कर अपने चाचा नासिर हुसैन के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर का काम शुरू कर दिया था। यूँ तो बचपन में ही आमिर महज ८ साल की उम्र में १९७३ में आई फिल्म यादों की बारात में बाल कलाकार के रूप में दिखाई दिये थे जिसके बाद वे एक और फिल्म मदहोश में भी दिखे लेकिन उनका र्पॉपर बॉलीवुड कॅरियर शुरू हुआ १९८४ में आई केतन मेहता की फिल्म होली से। दुर्भाग्यवश ये फिल्म नहीं चली और ना ही किसी ने उन पर ध्यान दिया। और फिर १९८८ में आई मंसूर खान की फिल्म कयामत से कयामत तक जिसमें आमिर की एक्टिंग इतनी शानदार थी कि उन्हें अपने कॅरियर का पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और बॉलीवुड में चारों तरफ उनकी एक्टिंग के चर्चे होने लगे।
फिर १९८९ में उनकी फिल्म आई राख जो अधिक सफल तो नहीं हो पाई लेकिन उनके अभिनय की हर तरफ तारीफ हुई। राख के बाद उन्होंने कुछ फिल्में कीं जिसमें से कुछ ही सफल हो पाईं। फिर इन्हें इंर्द कुमार की फिल्म दिल में काम करने का मौका मिला जो उस साल की सबसे हिट फिल्म बनी। इसके बाद तो हिट फिल्मों की लाइन लग गई जैसे कि दिल है कि मानता नहीं, जो जीता वही सिकंदर, हम हैं राही प्यार के और रंगीला। आमिर ने अपने आप को चॉकलेट बॉय की इमेज से बाहर निकालने के लिए सलमान खान के साथ कॉमेडी फिल्म अंदाज अपना अपना जैसी सफल फिल्में भी कीं और दर्शकों का दिल जीता।
अपने काम को और ज्यादा परफेक्ट बनाने के लिए आमिर ने एक साल में एक या दो फिल्में करने का निर्णय लिया और १९९६ में आई उनकी फिल्म राजा हिंदुस्तानी ९० के दशक की सबसे सफल बनी। जिसके बाद हर साल उनकी फिल्में आईं और उन्हें दर्शकों ने काफी पसंद भी किया। इतने सालों में आमिर अपना खुद का र्पोडक्शन हाउस भी बना चुके थे जिसका नाम है आमिर खान र्पोडक्शन। २००१ में उन्होंने आशुतोष गोवारिकर के साथ मिलकर लगान फिल्म बनाई जो उनके र्पोडक्शन हाउस की पहली फिल्म थी। इस फिल्म ने सफलता के नए आयामों को छुआ और यहाँ तक कि ये फिल्म ऑस्कर अवार्ड के फाइनल राउंड तक पहुँची लेकिन बस एक फिल्म से हार गई। इसके बाद आमिर ने बॉलीवुड से चार साल का ब्रेक लिया और २००५ में मंगल पांडे द राइजिंग स्टार से धमाकेदार वापसी की। २००६ में आई उनकी फिल्म रंग दे बसंती एक बार फिर ऑस्कर अवार्ड के लिए नामांकित हुई। इस फिल्म ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और उस साल की सबसे कमाऊ फिल्म बनी।
साल दर साल उनकी फिल्में आती रहीं और २००९ में आई फिल्म थ्री इडियट्स जो हिंदी सिनेमा के इतिहास में उस समय तक सबसे सफल और सबसे अधिक कमाने वाली फिल्म बनी। इस फिल्म ने ना केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी खूब नाम कमाया। ये पहली फिल्म बनी जिसने २०० करोड़ रुपए से अधिक कमाये। इस फिल्म के बाद आमिर की धूम ३, तलाश और पीके जैसी फिल्में आईं जिन्होंने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। अभी आई उनकी फिल्म दंगल ने तो कहा जा रहा है ४०० करोड़ रूपए तक कमा लिए हैं। आमिर टीवी पर अपने सीरियल सत्यमेव जयते के लिए खासे र्पसिद्ध रहे। उन्होंने इस सीरियल के माध्यम से गरीब, महिलाओं और पिछड़े हुए लोगों की परेशानियों को मंच देने की कोशिश की।
बात करें उनके निजी जीवन की तो आमिर की पहली शादी १९८६ में नीना दत्ता से हुई जिससे उनके दो बच्चे बेटा जुनैद और बेटी इरा हुए। लेकिन २००१ में उन्होंने नीना से तलाक ले लिया और २००५ में अपनी फिल्मों की असिस्टेंट र्पोड्यूसर किरण राव से दूसरी शादी कर ली। २०११ में सरोगेसी की मदद से इन्हें एक बेटा हुआ जिसका नाम इन्होंने आजाद राव खान रखा है।
आमिर की अधिकतर फिल्में ना केवल व्यावसायिक रूप से बल्कि उनके गजब के अभिनय के कारण बहुत सफल रहती हैं। दर्शकों में उनकी दीवानगी का आलम इस कदर है कि हर साल उन्हें आमिर की फिल्म का इंतजार रहता है और साथ ही ये भी माना जाने लगा है कि आमिर जो भी फिल्म बनाते हैं वे सफल ही रहती हैं। आमिर अपनी फिल्मों में परफेक्शन के लिए जाने जाते हैं। वे अपने हर रोल के लिए पूरी मेहनत करते हैं और कैरेक्टर के अनुसार ही अपने शरीर को ढाल लेते हैं। उनके जितना परफेक्शन कम ही अभिनेताओं में देखने को मिलता है। आमिर जवान पीढ़ी के लिए र्पेरणा का स्रोत हैं।
आमिर को कई बार फिल्मफेयर और राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं यहाँ तक कि उनकी फिल्मों को ऑस्कर अवार्ड और बाफ्टा अवार्ड्स में नामांकन भी मिल चुका है लेकिन एक फिल्म के लिए पुरस्कार ना मिलने के कारण आमिर किसी भी पुरस्कार समारोह में नहीं जाते। भारत सरकार ने इन्हें २००३ में पदमश्री और २०१० में पदम् भूषण से सम्मानित किया था। ये सभी सम्मान उनकी कला के सामने छोटे पड़ जाते हैं। (हिफी)

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