एजेंसी।आँखों में अमेरिका का ग्रीन कार्ड और वहां पर बसने का सपना लिए हर साल भारत से हज़ारों सॉफ्टवेर इंजीनियर अमेरिका की सिलिकन वैली पहंचते है।हाल ही में एक ऐसा नज़ारा सोशल मीडिया पर आया है जो वहां की हकीकत को बयान करता है।अमेरिका के सिलिकन वैली का एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जिसकी उम्र 40 साल है और सोशल मीडिया साइट ट्विटर में नौकरी करता है वह साल भर की बेसिक सैलरी 1 करोड़ रुपये(1 लाख 60 हजार डॉलर)से अधिक होने के बावजूद सैनफ्रांसिस्को के बे एरिया में अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ एक टेंट में किसी तरह से अपनी ज़िन्दगी गुज़र बसर कर रहा है।वह किसी प्रकार से अपने घर का खर्च चला रहा है।सैनफ्रांसिस्को में दो कमरे के छोटे से घर के लिए प्रति माह 3000 डॉलर का रेंट है जो उसका सालभर का सबसे बड़ा खर्च है।
एक अखबार की खबर के मुताबिक बीते पांच साल में अमेरिका के सिलिकन वैली में जिस प्रकार से सैलरी बढ़ी तो वहीँ कई मकान के लिए रेंट मेंभारी इज़ाफ़ा देखने को मिला।सिलिकन वैली में यह शहर रेंट के मामले में दुनिया का सबसे महंगा शहर है।इस शहर में घर का रेंट सिर्फ आईटी इंजीनियर ही नही परेशान है बल्कि भारी-भरकम रेंट के चलते यहां से टीचर,फायर फाइटर समेत मध्यम आय वर्ग में काम करने वाले कई लोगों शहर से पलायन कर चुके है। अधिकत्तर लोग शहर से 4-5 घंटे की दूरी पर सस्ते घर लेकर रहते हैं।रोज नौकरी पर आने के लिए उनको घंटो ट्रेन और बस का सफर करना पड़ता है।
गौरतलब है कि यही हाल फेसबुक जैसी कंपनी के इंजीनियर्स का भी है।पिछले साल फेसबुक के कर्मचारियों ने मार्क जकरबर्ग से अपील की थी कि उन्हें शहर में कंपनी की तरफ से रहने के लिए या तो घर दिया जाए अथवा कंपनी उन्हें रेंट पर कुछ सब्सिडी देना शुरू कर दे।

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