पहले लोग कपड़े तो जरूर पहनते होंगे लेकिन शायद वे इतने खूबसूरत और फैशनेबल नहीं होते होंगे जितने आज होते हैं. एलायस होवे को दुनिया सिलाई मशीन के आविष्कारक के तौर पर जानती है. आज जितने फैशनेबल कपड़े पहनते हैं ये उन्हीं के आविष्कार की देन हैं. उन्होंने  1846 में 10 सितंबर को सिलाई मशीन का पेटेंट कराया था.एलायस होवे का जन्म 1819 में 9 जुलाई को हुआ था.उन्होंने  1835 में अमेरिका की  टेक्सटाइल कंपनी में बतौर प्रशिक्षु अपने करियर की शुरुआत की. 1846 में उन्हें सिलाई मसीन से लॉकस्टिच डिजाइन के लिए पहले अमेरिकी पेटेंट पुरस्कार से नवाजा गया था.अमेरिका में कोई भी शख्स मशीन को खरीदने के लिए तैयार नहीं हुआ. होवे के भाई ने ब्रिटेन तक का सफर तय कर इसे 250 पाउंड में बेचा.उन्होंने  1851 में जिपर (पेंट में लगने वाली चेन) का आविष्कार कर उसे पेटेंट कराया.सिलाई मशीन सिलाई की प्रथम मशीन ए. वाईसेन्थाल ने 1755  बनाई थी। इसकी सूई के मध्य में एक छेद था तथा दोनों सिरे नुकीले थे। 1790. में थामस सेंट ने दूसरी मशीन का आविष्कार किया.

भारत में सिलाई मशीन
भारत में भी उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक मशीन आ गई थी. इसमें दो मुख्य थीं, अमरीका की सिंगर तथा इंग्लैंड की ‘पफ’. स्वतंत्रता के बाद भारत में भी मशीनें बनने लग गई जिनमें ‘उषा’ प्रमुख तथा बहुत उन्नत है.भारत में 1935 में कोलकाता (कलकत्ता) के  कारखाने में उषा  की पहली सिलाई मशीन बनाई गई. मशीन के सारे पुर्जें भारत में ही बनाए गए थे. अब तो भारत में तरह-तरह की सिलाई मशीनें बनती हैं जिन्हें विदेशों में भी बेचा जाता है. सिंगर के आधार पर मेरिट भी भारत में ही बनती है.दो  हजार से ज्यादा तरह की मशीनें अलग-अलग कार्यों के लिए इस्तेमाल की जाती है:- जैसे कपड़ा, चमड़ा, आदि सीने की. अब तो बटन टांकने, काज बनाने, कसीदा का सब प्रकार की मशीनें अलग-अलग बनने लगी हैं. अब मशीन बिजली द्वारा भी चलाई जाती है.

खून के बड़े थक्के के कारण सिर्फ 48 साल की उम्र में वे दुनिया को अलविदा कह गए.एजेंसी 

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