‘कवि दिवस’
स्वप्निल संसार। लखनऊ। प्राण न पागल हो तुम यों, पृथ्वी पर वह प्रेम कहाँ..मोहमयी छलना भर है, भटको न अहो अब…
भीड़ से जुदा
स्वप्निल संसार। लखनऊ। प्राण न पागल हो तुम यों, पृथ्वी पर वह प्रेम कहाँ..मोहमयी छलना भर है, भटको न अहो अब…
पुण्य तिथि पर विशेष-स्वप्निल संसार। शकील बदायूँनी महान शायर और गीतकार थे। बदायूँ में 3 अगस्त 1916 को जन्मे शकील अहमद…