6 सितम्बर शाम 5 बजे
गान्धी प्रतिमा हज़रतगंज लखनऊ

दोस्तों, कल्बुर्गी, पन्सारे और दभोल्कर के बाद, फासीवादी-दक्षिणपन्थी, नफरत की राजनीती करने वाली काली ताकतों ने बंगलुरु में वरिष्ठ महिला पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी है। गौरी लंकेश का ‘जुर्म’ केवल इतना था की वो सम्प्रदायिक ताकतों का विरोध करती थीं…और लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़ी होती थीं।

हम सभी नागरिक समाज के लोग एक-एक करके मारे जा रहे हैं। संविधान ने जो हमे बोलने का मौलिक अधिकार दिया है…वो खतरे में है।

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