अन्तरराष्ट्रीय छात्र दिवस प्रत्येक वर्ष ’17 नवम्बर’ को मनाया जाता है।

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28 अक्टूबर, 1939 को नाज़ी कब्जे वाले चेकोस्लोवाकिया की राजधानी ‘प्राग’ में वहाँ के छात्रों और शिक्षकों ने अपने देश की स्थापना की वर्षगाँठ के अवसर पर एक प्रदर्शन का आयोजन किया था।
नाज़ियों ने इस प्रदर्शन पर गोलियाँ चलाईं, जिसके परिणामस्वरूप मेडिकल फेकल्टी का एक छात्र, जिसका नाम ‘जॉन ओपलेटल’ था, मारा गया। उस छात्र के अंतिम संस्कार के समय भी एक विरोध प्रदर्शन किया गया। तब दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया था।
बाद में 177  नवम्बर’ की सुबह नाज़ियों ने छात्रों के होस्टल को घेरकर 1200 से अधिक छात्रों को गिरफ़्तार किया और एक यातना शिविर में बंद कर दिया।
नाज़ियों द्वारा यातनाएँ देने के बाद नौ छात्रों को फ़ाँसी पर लटका दिया गया। इस घटना के दो वर्ष बाद फ़ासिज़्म के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने वाले छात्रों का लंदन में एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया गया, जहाँ यह फैसला किया गया कि नाज़ियों द्वारा शहीद किए गए छात्रों की याद में आगे से प्रत्येक वर्ष ’17 नवम्बर’ को ‘अन्तरराष्ट्रीय छात्र एकजुटता दिवस’ मनाया जाएगा।
पुण्य तिथि
लाला लाजपत राय 28 जनवरी, 1865 – 17 नवंबर, 1928  लाहौर- को भारत के महान् क्रांतिकारियों में गिना जाता है। आजीवन ब्रिटिश Image result for लाला लाजपत राय

राजशक्ति का सामना करते हुए अपने प्राणों की परवाह न करने वाले लाला लाजपत राय को ‘पंजाब केसरी’ भी कहा जाता है। लालाजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता तथा पूरे पंजाब के प्रतिनिधि थे। उन्हें ‘पंजाब के शेर’ की उपाधि भी मिली थी। उन्होंने क़ानून की शिक्षा प्राप्त कर हिसार में वकालत प्रारम्भ की थी, किन्तु बाद में स्वामी दयानंद के सम्पर्क में आने के कारण वे आर्य समाज के प्रबल समर्थक बन गये। यहीं से उनमें उग्र राष्ट्रीयता की भावना जागृत हुई। लालाजी को पंजाब में वही स्थान प्राप्त है, जो महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक को प्राप्त है।
बालासाहेब केशव ठाकरे 23 जनवरी, 1926 – 17 नवंबर, 2012 बाल ठाकरे ने अपने कैरियर की शुरुआत मुंबई के अंग्रेज़ी दैनिक ‘द फ्री प्रेस जर्नल’  के साथ एक कार्टूनिस्‍ट के रूप में की। 1960 में बाल ठाकरे ने कार्टूनिस्‍ट की यह नौकरी छोड़ दी और अपना राजनीतिक साप्‍ताहिक अख़बार मार्मिक निकाला। बाल ठाकरे के कार्टून ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ में भी हर रविवार को छपा करते थे। उनका राजनीतिक दर्शन उनके पिता से प्रभावित है। उनके पिता केशव सीताराम ठाकरे ‘संयुक्‍त महाराष्‍ट्र मूवमेंट’ के जाने-पहचाने व्यक्ति थे। बाल ठाकरे के पिता केशव सीताराम ठाकरे ने भाषायी आधार पर महाराष्‍ट्र राज्‍य के निर्माण में अच्‍छा योगदान दिया। ‘मार्मिक’ के माध्‍यम से बाल ठाकरे ने मुंबई में गुजरातियों, मारवाडियों और दक्षिण भारतीय लोगों के बढ़ते प्रभाव के ख़िलाफ़ मुहिम चलायी।

जयंती
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पद्मजा नायडू 17 नवम्बर, 1900- 2 मई 1975- प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ श्रीमती सरोजिनी नायडू की पुत्री थीं। इन्होंने अपनी माता के समान ही अपना सारा जीवन भारत के हितों के लिए समर्पित कर दिया था। राष्ट्रीय सेवा और इसके साथ ही उनका मानवीय दृष्टिकोण हमेशा याद किया जाता है। पद्मजा नायडू को 1962 में ‘भारत सरकार’ के सर्वोच्च दूसरे नागरिक पुरस्कार ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।

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