लखनऊ। स्वप्निल संसार। गीता जयंती के पावन पर्व पर गीता परिवार उ.प्र. के तत्वाधान में सम्पूर्ण श्रीमद् भगवद्गीता परायण का पाठ बृहस्पतिवार को श्री दुर्गा जी मंदिर, शास्त्रीं नगर लखनऊ किया गया। गीता जयंती के अवसर पर गीता क्या है यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत! अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् अर्थात भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे अर्जुन जब जब धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म और आगे बढ़ने लगता है तब तब मैं स्वयं की सृष्टि कर करता हूं अर्थात जन्म लेता हूं दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनः स्थापना के लिए विभिन्न युगों और कालों में अवतरित होता हूं भाई लोग श्रीमद्भगवद्गीता मानव से संबंधित एक ज्ञान का संकलन है जो भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को सुनाया था जब महाभारत के युद्ध में अर्जुन विचलित हो कर अपने कर्तव्य से विचलित हो रहे थे भाई लोग यह गीता का उपदेश आज से 7000 वर्ष पहले सुनाई गई थी और इसकी खासियत यह है कि आज के दिन में इतना प्रासंगिक है तथा उतना ही उपयोगी है तथा यह जब तब प्रशंसक रहेगा जब तक मानव जीवन का अस्तित्व है यह गीता उपदेश कुरुक्षेत्र के उस रंगभूमि में रविवार के दिन सुनाया गया था तथा एकादशी का दिन था इसीलिए आज भी हमारे हिंदू धर्म में एकादशी को इतना ही महत्व माना जाता है अर्थात हमारे पुराणों के अनुसार यह गीता का उपदेश लगभग 45 मिनट में सुनाई गई थी और यह गीता ज्ञान कर्तव्य से भटकते हुए अर्जुन को कर्तव्य सिखाने के लिए और अपने आने वाली पीढ़ियों को योग धर्म ज्ञान सिखाने के लिए दिया गया था भाई लोगों श्रीमद्भगवद्गीता के कुल 18 अध्याय हैं और 700 श्लोक हैं जिस में मुख्य रुप से ज्ञान भक्ति योग मार्गो की विस्तारित से व्याख्या की गई है और इन मार्गों पर व्यक्ति चलने से निश्चित ही परम पद अर्थात जीवन में सफलता का अधिकारी बन जाता है इस गीता उपदेश को उस कुरुक्षेत्र में सिर्फ अर्जुन के अलावा धृतराष्ट्र और संजय ने सुनी थी और यह अर्जुन से पहले यह गीता उपदेश सूर्यदेव को दिया गया था श्रीमद्भगवद्गीता की कीमती हमारे उपनिषदों में होती है जो कि हम हिंदू के धर्म ग्रंथ हैं और जिन में जीवन के विभिन्न पहलुओं और जीवन में जीने का तरीका बताया गया है साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता हमारे काव्य महाभारत का ही एक अंग है श्रीमद्भगवद्गीता का एक सार यह भी है कि किसी भी मनुष्य को किसी भी स्थिति में घबराना नहीं चाहिए ना ही अपने कर्तव्य से विमुख होना चाहिए क्योंकि अंत में जीत सत्य की ही होती है और परिवर्तन ही इस संसार का नियम है श्रीमद भगवद गीता में कुल 700 श्लोक हैं जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने 574 और अर्जुन ने 85 धृतराष्ट्र ने 1 तथा संजय ने 40 श्लोक कहे हैं तो आप लोगों ने श्रवण किया की श्रीमद्भगवद्गीता क्या है भाई लोगों आजकल गीता की कोई मान्यता नहीं है इसीलिए गीता की का प्रचार कीजिए कि हमारे देश में सबसे बड़ा ग्रंथ गीता ही माना गया है। गीता पढ़े, पढ़ाए, जीवन मे लाये।

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