आज़मगढ़: राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रेस को जारी एक बयान में कहाकि उनपर दर्ज करवाया गया दहेज हत्या का मुकदमा उन्हें बदनाम करने के लिए विरोधियों दुआरा रचा गया राजनैतिक षड़यंत्र है। जिस युवती की तथाकथित हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है वो मेरे बड़े भाई की बहु थी जिसका का देहांत लगभग 2 महीना पहले एक दुर्घटना में मेरे बड़े भाई के घर पे हुआ था और उसकी जनाज़े की नमाज़ में पूरे शहर के साथ ही लड़की का पूरा परिवार शामिल था और जनाज़े की नमाज़ स्वयं लड़की के भाई ने पढ़ाई थी और ग़ुस्ल में भी लड़की के परिवार वाले (भाभी) शामिल थीं। भाइयों ने लड़की की लाश को देखा था और तस्वीरें भी ली थीं। तब किसी को कोई शिकायत नही थी फिर अचानक लगभग 2 महीने बाद लड़की के बहनोई हामिद संजरी ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। सवाल ये है कि लड़की के पिता और आधा दर्जन सगे भाई होने के बावजूद मुक़दमा हामिद ने क्यों दर्ज कराया? मरहूमा के 3 मासूम बच्चे हैं और शादी को 9 साल हो चुका है तो क्या इतने सालों बाद कोई दहेज मांगेगा और उसके लिए हत्या कर देगा? लड़की का बड़ा भाई शहर में ही रहता है तो आखिर हामिद क्यों संजरपुर से आज़मगढ़ कोतवाली आकर मुक़दमा दर्ज कराते हैं? ये वही हामिद हैं जो मेरी पार्टी राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल में थे और जिन्हें लगभग 2-3 साल पहले पार्टी से निकाल दिया गया था और इस समय वो मजलिस इत्तेहादुल मुस्लेमीन MIM की प्रदेश कमेटी में है और निकाले जाने के बाद से ही लगातार मेरा निजी तौर पे और पार्टी का विरोध/बुराई करता रहा है। ऐसी स्तिथि में ये साफ दर्शाता है कि राजनैतिक द्वेष के नाते मुझे बदनाम करने हेतु हामिद ने ये मुक़दमा दर्ज कराया है। पूरा शहर जानता है कि हम दोनों भाई पिछले 25 साल से भी ज़्यादा समय से अलग अलग मकान में अपने परिवार संग रहते हैं परंतु परिवार एक होने के नाते हम एक दूसरे के ग़म खुशी में शामिल रहते हैं, ऐसे में क्या केवल जनाज़े में शामिल होने से कोई हत्यारोपी हो जाएगा? मुझे पूरा यकीन है कि पुलिस जाँच में सारी बात सामने आएगी और सच सबके सामने होगा।

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