गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजे राज्य में कांग्रेस नेताओं के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। गुजरात में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। इसलिए राज्य के कांग्रेसियों में उत्साह देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव कांग्रेस को भले ही पराजय मिली लेकिन हरीश रावत ने महानगर के मेयर चुनाव में ताकत दिखाने की पूरी तैयारी कर रखी है। अभी देहरादून में यह तय नहीं है कि मेयर की सीट किसके लिए आरक्षित की जाएगी। इसके बावजूद तैयारियां हो रही हैं। सत्तारूढ़ भाजपा भी मेयर पदों पर उसी तरह कब्जा करना चाहता है जैसे उत्तर प्रदेश में भाजपा ने किया है। मेयर टिकट के लिए कांग्रेस में सबसे मजबूत दावेदार दिनेश अग्रवाल बताये जा रहे हैं। दिनेश अग्रवाल पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे हैं। विधानसभा चुनाव वह हार गये थे लेकिन उनका जनाधार मजबूत है। इसलिए कांग्रेस पार्टी भी उनकी दावेदारी को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। श्री अग्रवाल के अलावा सूर्यकांत धस्माना भी मेयर के टिकट पर दावेदारी जता रहे हैं। जनाधार के तौर पर भी धस्माना मजबूत स्थिति में है। पार्टी ने उन्हंे देहरादून कैंट से विधानसभा चुनाव मंे प्रत्याशी बनाया था। वह चुनाव हार गये। इसलिए यह जरूरी नहीं माना जा रहा है कि पार्टी उन पर दांव लगाये। इसी क्रम मंे एक नाम अशोक वर्मा का भी है। नगर निगम में लम्बे समय से राजनीति करने वाले अशोक वर्मा का ऐन वक्त पर मेयर के लिए टिकट कट जाता है। वह नगर निगम में चार बार पार्षद रह चुके हैं यदि यह सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होती है तो अशोक वर्मा की दावेदारी मजबूत समझी जाएगी। इसी के साथ एक नाम राजकुमार का भी सामने आ रहा है। पूर्व विधायक राजकुमार कांग्रेस पार्टी के दलित चेहरा माने जाते हैं। अनुसूचित जाति के लिए मेयर पद आरक्षित होने पर राजकुमार ही कांग्रेस के मजबूत दावेदार होंगे। राजकुमार को नगर निगम की राजनीति का लम्बा अनुभव भी है। वह तीन बार पार्षद रहे हैं और उसके बाद विधानसभा पहुंचे। महानगर मंे उनका अच्छा जनाधार है विशेष रूप से मलिन बस्तियों में उनकी जबर्दस्त पकड़ है। मेयर की सामान्य सीट होने पर लालचन्द्र शर्मा सबसे मजबूत दावेदार हो सकते हैं। श्री शर्मा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वह पूर्व महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। नगर निगम के पिछले चुनावों में भी उन्हांेने टिकट की दावेदारी की थी। वह एक बार देहरा खास से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के करीबी होने का लाभ भी उनको मिलेगा। इसके साथ ही महत्वपूर्ण यह होगा कि प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की पसंद आपस में टकराती है तो कांग्रेस के लिए मेयर प्रत्याशी तय करना कठिन होगा ही, चुनाव जीतना और भी कठिन हो जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह मेयर पद पर भाजपा का कब्जा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। (हिफी)

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