विकास को ही आधार बनाएंगे डा0 रमन
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह अगले विधानसभा चुनाव में विकास को ही आधार बनाएंगे छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की रणनीति साफ कर दी है। करीब एक साल बाद होने वाला यह चुनाव दो टूक विकास के मोर्चे पर लड़ा जाएगा। जाहिर है कि यही वह मोर्चा है जहां विपक्ष के पास अपने को साबित करने के लिए कुछ नहीं होगा, सिवाय रमन सरकार पर इल्जाम लगाने के। राजनीति के मंजे खिलाड़ी रमन सिंह इस बात को बेहतर समझते हैं कि आज की तारीख में केवल इल्जाम लगाकर कोई दल भाजपा से मुकाबिल नहीं हो सकता। यही वजह है कि मुख्यमंत्री की चिंता अब विपक्ष नहीं, वह घोषणाएं हैं जो स्वयं रमन सरकार ने की हैं और जिन्हें अभी पूर्ण होना है। छत्तीसगढ़ में रमन राज के चैदह वर्ष पूर्ण होने पर गत दिनों अपने शीर्ष सियासी कुनबे के साथ मुख्यमंत्री जब मीडिया के सामने आए तो वो यूं ही निश्चिंत नहीं थे, वजहें भी थीं। सरकार के चैदह साल पूर्ण होने पर रमन सिंह ने कई गुटों में बंटे विपक्ष को भी अपने ही अंदाज में शुभकामनाएं दीं। उनका यह कहना कि विपक्ष ने भी शानदार भूमिका अदा की और मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भी वो ऐसा ही प्रदर्शन करेंगे, साफ कर गया कि रमन सिंह विधानसभा में विपक्ष के संख्या बल की ओर इशारा कर रहे थे, भविष्य भी बता रहे थे। हालांकि लगे हाथ उन्होंने अपने दल में किसी भी गुटबाजी से साफ इंकार करते हुए यह भी मैसेज पास किया कि आगे भी गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अब साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव फतह करने के लिए बचे एक वर्ष में भारतीय जनता पार्टी ग्राम्य विकास व इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पूरा जोर लगा देगी। (हिफी)
सुशासन कुमार के राज्य में कुशासन
बिहार में जब लालू-राबड़ी के साम्राज्य को ध्वस्त कर नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ राजग की सरकार बनायी थी तब उनके प्रशासन की तारीफ की गयी और यहां तक कहा गया कि बिहार को जंगलराज से मुक्ति मिल गयी है। उसी समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुशासन कुमार का खिताब मिला था। लगभग एक दशक बाद जब बिहार के राजनीतिक समीकरण बदले और नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़कर लालू यादव के साथ पुनः सरकार बनायी तब उनके सुशासन कुमार होने पर ही सवाल उठाये गये थे क्योंकि बिहार में जंगल राज के प्रतीक रहे श्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी नीतीश कुमार की सरकार में शामिल थी। यह रिश्ता उस समय और पक्का हो गया जब बिहार में महागठबंधन ने 2016 में भारी बहुमत से सरकार बनायी। नीतीश कुमार ने अपनी सुशासन कुमार की छवि को फिर से बनाने के लिए ही लालू यादव का साथ छोड़ा और भाजपा के साथ सरकार बना ली। अब नीतीश सुशासन कुमार के रूप में सरकार चला रहे हैं लेकिन उनकी ही सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री खुर्शीद आलम को एक व्यक्ति ने धमकी दी है और उनसे एक लाख रुपये की फिरौती मांगी है। फिरौती की रकम नहीं देने पर हत्या की धमकी दी गयी है। यह मामला बेतिया जिले का है। बेतिया के पुलिस अधीक्षक विनय कुमार ने इस बात की पुष्टि की और कहा कि मंत्री की तरफ से प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। रिपोर्ट नामजद दर्ज करायी गयी है। धमकी देने वाले का नाम मंत्री जी ने इम्तियाज बताया है। यहां पर ध्यान देने की बात यह भी है कि मंत्री खुर्शीद आलम ने इस प्रकार की शिकायत दूसरी बार दर्ज करायी। उन्होंने इसी साल जून में पटना में अपने आवास पर धमकी मिलने का मुकदमा दर्ज कराया था। फोन काल करने वाला पकड़ा भी गया। मंत्री खुर्शीद आलम कहते हैं कि बिहार में सुशासन है और मैं किसी तरह से भी भयभीत नहीं हूं लेकिन आमजनता में इससे गलत संदेश जा रहा है। प्रदेश के मंत्री को जब इस तरह से धमकियां मिल रही हैं तो व्यापारी और आमजनता का क्या होगा? उसकी तो शिकायत भी नहीं सुनी जाएगी। नीतीश कुमार के सुशासन पर इस बार भाजपा भी खामोश है जो लालू यादव की सरकार पर आरोप लगाने में एक मिनट की देरी नहीं करती थी। (हिफी)
नाना भाई पटोले ने मचायी हलचल

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना की सरकार को अपने सहयोगी दल शिवसेना के तीखे प्रहारों का सामना करना ही पड़ा था लेकिन अब भाजपा के ही सांसद नानाभाऊ पटोले के त्यागपत्र ने राजनीतिक महौल में हलचल मचा रखी है। नानाभाऊ पटोले ने इस्तीफा भी उस समय दिया है जब गुजरात जैसे भाजपा के लिए अति महत्वपूर्ण राज्य में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने उनके इस्तीफे पर कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं जतायी और उन्हें उम्मीद है कि सांसद पटोले को शीघ्र ही अपनी गलती का अहसास होगा और वह फिर से भाजपा मंे शामिल हो जाएंगे। महाराष्ट्र के भंडारा-गोंडिया से भाजपा सांसद नानाभाऊ पटोले ने 8 दिसम्बर को तत्काल प्रभाव से सदन से इस्तीफा दे दिया था। उसके एक दिन बाद ही गुजरात विधानसभा के पहले चरण का मतदान होना था इसलिए गुजरात चुनाव की तैयारियांे में जुटी भाजपा के लिए यह बड़ा झटका माना गया। सांसद पटोले ने कृषि संकट से निपटने में केन्द्र सरकार की अक्षमता को दोषी ठहराया, साथ ही जीएसटी और नोटबंदी के दौरान जनता को हुई समस्याओं का भी जिक्र किया। गुजरात में भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस ने इन दोनों मामलों को चुनाव का मुद्दा भी बना रखा है। इस प्रकार भाजपा के सांसद ने कांग्रेस के आरोपों को पुष्ट करने का काम किया है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस सांसद पटोले को मनाने का ही प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री पटोले को जल्द ही अपने इस्तीफे के रूप में की गयी गलती का अहसास होगा अर्थात वे फिर से भाजपा के साथ जुड़ जाएंगे। यहां पर ध्यान देने की बात यह भी है कि सांसद नानाभाऊ पटोले महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस सरकार के आलोचक रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा था। श्री पटोले कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों में रह चुके हैं। वह 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता प्रफुल्ल पटेल को चुनाव में पराजित किया था। महाराष्ट्र में विदर्भ को अलग राज्य बनाने की मांग तेजी से उठने लगी है। भाजपा विधायक आशीष देशमुख ने विदर्भ को अलग राज्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। इस पर मुख्यमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं जतायी लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। (हिफी)

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