स्वप्निल संसार। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि बड़ी शानशौकत के साथ भाजपा ने राजधानी लखनऊ में निवेशकों का जो मेला आयोजित किया उसमें निवेशकों की तरफ से वादें तो बड़े-बड़े किए गए लेकिन उसमें कितने जमींनी हकीकत में उतरेंगे और कितने दाखिलदफ्तर हो जाएंगें कहना मुश्किल है। ऐसा लगता है कि प्रदेश की जनता और विशेषकर नौजवानों को सब्जबाग दिखाने के पीछे लोकसभा चुनाव पूर्व की रणनीति बनाई जा रही है।
यह संयोग ऐसे ही नहीं कि एक ओर भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में करोड़ों रूपए विज्ञापन और शहर की साफ सफाई तथा सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च कर वाहवाही लूटने की कोशिश की है वहीं भाजपा का मातृ संगठन आरएसएस वाराणसी में अपने प्रदर्शन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में तीन लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों को जुटाकर अपना शक्ति प्रदर्शन करने जा रहा है।  2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले यह ध्रुवीकरण की नई साजिश होगी। आश्चर्य है कि चार साल कि चुप्पी के बाद अचानक इतनी तेजी कहां से आ गई?
प्रदेश का भविष्य में कायाकल्प करने का इरादा जताने वाली भाजपा की संकीर्ण मानसिकता का पता इसी से चल जाता है कि प्रदेश के विकास में अखिलेश यादव जी के योगदान को स्वीकार करने में उसे पसीना छूटता है। प्रदेश में अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार कर  अखिलेश  ने ही निवेशकों के आने की आधार भूमि तैयार की थी। एक्सप्रेस-वे, चारलेन की चौड़ी सड़के और सुरक्षा के लिए यूपी डायल 100 नं0 सेवा जिसकी प्रशंसा प्रसिद्ध उद्यमी  आनंद महिंद्रा ने भी करते हुए उसे विश्वस्तरीय बताया। अखिलेश के इन कामों को स्वीकार न करना भाजपा का विरोधाभासी आचरण है। जनता इन पर विश्वास करे तो कैसे? वैसे भी प्रदेश में निवेशक मेला में जैसी अव्यवस्था पहले दिन से ही दिखाई पड़ी और निवेशकों का यहां की नौकरशाही से जैसा पाला पड़ा उससे यह एक तमाशा ही साबित होने वाला है। यह बात दूसरे दिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और मंत्रीगण भी समझ गए थे तभी उन्होंने निवेशकों के साथ दूसरे दिन के सत्रों में अपनी भागीदारी नहीं दी। इस तरह यह निवेशक सम्मेलन एक चुनावी मखौल में बदल गया। रोजगार भी भाजपा सरकारें क्या पैदा करेंगी जबकि उन्होंने  अखिलेश यादव के समय भर्ती हुए नौजवानों को सड़क पर पहुंचा दिया है।
भाजपा सरकार इस निवेशक मेला के जरिए चाहती तो कृषि अर्थ व्यवस्था को गति देने का काम भी कर सकती थी लेकिन उसका सारा ध्यान वाहवाही पर ही लगा है। मानवीय श्रम आधारित उद्योग की जगह पूंजी प्रधान उद्योग लगाने पर जोर असंतुलित विकास को बढ़ाएगा। चार वर्ष में केंद्र सरकार ने एक भी कदम किसानों के हित में नहीं उठाया है। किसानों के प्रति किए गए भाजपा के सभी वादे झूठे साबित हुए हैं। किसान की आत्महत्या भी भाजपा नेतृत्व को झकझोरती नहीं।
उत्तर प्रदेश से भाजपा के 73 सांसद चुने गए हैं लेकिन उन्होंने कभी प्रदेश के विकासकार्यों में कोई रूचि नहीं दिखाई। समाजवादी सरकार के समय अखिलेश यादव ने राज्य का कल्पनातीत विकास किया है। भाजपा को अपने संकल्प पत्र की चुनावी वादों की कतई चिंता नहीं रही है। अब जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं तो फिर जनता को भ्रमजाल में फंसाने के करतब किये जा रहे हैं पर जनता सच्चाई से परिचित है। अखिलेश यादव ने बार-बार कहा है कि अब समय आ गया है कि सच्चाई पर चर्चा होनी चाहिए। कोई भी सच्चाई से भाग नहीं सकता।

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