मध्य प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने उप चुनावों में जीत हासिल करने के बाद वहां की समस्याओं को भी उठाना शुरू कर दिया है। राज्य में पानी के संकट को लेकर भी कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे लेकिन विपक्षी एकता के समीकरण गड़बड़ा गये हैं। उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के गठजोड़ से भाजपा की दोनों महत्वपूर्ण सीटों पर लोकसभा उप चुनाव जीतने के बाद बसपा प्रमुख सुश्री मायावती राज्य विधानसभा चुनाव में उत्साह दिखाने लगी हैं। यहां पर कांग्रेस ही प्रमुख विपक्षी है लेकिन सुश्री मायावती अगर समाजवादी पार्टी को साथ लेकर चुनाव लड़ती है तो कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचेगा। कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बहुत अच्छा माहौल बना रखा है। यहां तक कि उनके प्रतिद्वंद्वी नेता कमलनाथ भी अब ज्योतिरादित्य के पक्ष में बयान देने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव यह कहते हैं कि राहुल गांधी से उनकी दोस्ती बरकरार है लेकिन उत्तर प्रदेश के लोकसभा उप चुनाव में कांग्रेस ने सपा से सलाह-मशविरा किये बगैर प्रत्याशी उतारे थे और सपा-बसपा का गठबंधन होने के बाद भी अपना प्रत्याशी वापस नहीं लिये। कांग्रेस प्रत्याशियों को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। इस गठबंधन को आधार बनाकर सुश्री मायावती मध्य प्रदेश में सपा को कांग्रेस के साथ नहीं खड़ा होने देंगी।
कांग्रेस की चिंता का यही कारण है। बसपा के नेता यह दावा कर रहे हैं कि तीसरे मोर्चे के रूप में वह सबसे बड़ी पार्टी है और उसके बगैर भाजपा अथवा कांग्रेस प्रदेश की सत्ता पर काबिज नहीं हो सकती। बसपा के राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में बसपा ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर जिस तरह भाजपा के मजबूत गढ़ गोरखपुर और फूलपुुर में करारी शिकस्त दी है उसके बाद अब यही गठबंधन मध्य प्रदेश में भी भाजपा की सरकार को उखाड़ फेंकेगा। बसपा ने विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही ग्वालियर में जोन स्तर का सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में राज्य के 13 जिलों से करीब 5 हजार कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। इस प्रकार उत्तर प्रदेश की विजय का शंखनाद मध्य प्रदेश तक पहुंचा है। कांग्रेस के सामने इससे निश्चित रूप से दिक्कत खड़ी होगी और लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस के साथ किसी गठबंधन पर अभी अखिलेश यादव भी तैयार नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने दूरदर्शिता से रणनीति नहीं बनायी इसका पछतावा अब राहुल गांधी को भी हो रहा होगा। उन्होंंने इस जीत पर खुलकर सपा-बसपा को बधाई तक नहीं दी और कहा कि उप चुनावों में जीतने वालों को बधाई। कांग्रेस अभी भाजपा पर ही प्रहार कर रही है जबकि उसे सपा-बसपा को साधने की जरूरत है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नेता कमलनाथ भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ही तीखा तंज कस रहे हैं वह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में उप चुनावों ने रामराज्य की पोल खोल दी है। श्री कमलनाथ अभी अखिलेश यादव और मायावती की तारीफ करने से बच रहे हैं जबकि बिहार में अररिया लोकसभा सीट के उप चुनाव में विजय प्राप्त करने वाले राजद की तारीफ करते हैं। कांग्रेस के महत्व को दर्शाते हुए कमलनाथ ट्वीट करते हैं कि राजस्थान व एमपी के उप चुनाव परिणाम के बाद यूपी के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की गोरखपुर व फूलपुर सीट व बिहार की अररिया सीट के उप चुनावों के परिणामों ने यूपी में कथित एक वर्ष के रामराज्य की पोल खोल दी है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस का यही असमंजस उसकी मुसीबत बन सकता है। प्रदेश के नेता केन्द्रीय नेतृत्व का मुंह देख रहे हैं और राहुल गांधी भी इस मामले में कोई फैसला नहीं कर पाये क्योंकि उनकी माता श्रीमती सोनिया गांधी ने यूपीए की नेता की हैसियत से दिल्ली में विपक्षी दलों की जो बैठक बुलाई थी उसमें सपा, बसपा के प्रतिनिधि समेत १३ दलों के नेता शामिल थे। यह खिचड़ी देर में पकेगी लेकिन मध्य प्रदेश को लेकर कांग्रेस को शीघ्र ही फैसला करना होगा। (हिफी)

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