निजी जासूस बैंक की कितनी करेंगे मदद?
प्राइवेट डिटेक्टिव के उपन्यास पहले खूब पढ़े जाते थे, अब बैंकों ने भी लगता है उसी से प्रेरणा लेकर प्राइवेट जासूस तैनात करने की रणनीति बनायी है। पिछले कुछ समय से देश में कई तरह के बैंक घोटाले और अनियमिताएं सामने आयी हैं। इनमें पंजाब नेशनल बैंक का मामला सबसे बड़ा और चर्चित है। हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके रिश्तेदार मेहुल चोकसी ने पंजाब नेशनल बैंक के लगभग 13 हजार करोड़ रूपये डकारने के बाद देश ही छोड़ दिया। इसके बाद कोठारी उद्योग समूह के विक्रम कोठारी का नाम चर्चित हुआ। बैंकों की एनपीए बढ़ती ही जा रही है। यह रकम बैंकों की ऐसी है जिस पर न तो कोई ब्याज मिल रहा है और न मूलधन ही वापस हुआ है। कर्जदारों ने इस रकम को फंसा दिया है। इसलिए इसे बैड लोन कहते हैं। पंजाब नेशनल का ही बैडलोन बहुत ज्यादा है। गत वर्ष 31 दिसम्बर तक 57 हजार 5 सौ 19 करोड़ रूपये हो गया था। नीरव मोदी का 13 हजार करोड़ का घोटाला तो इसके सामने कुछ भी नहीं है। इसलिए पंजाब नेशनल बैंक ने डिटेक्टिव के जरिए कर्जदारों पर नजर रखने के लिए डिटेक्टिव एजेंट तैनात करने के लिए बाकायदा आवेदन मांगे हैं। ये आवेदन 5 मई तक दिये जा सकते हैं। सवाल यह है कि निजी जासूस बैंक की कितनी मदद कर पाएंगे?
पंजाब नेशनल बैंक के ही घोटाले पर नजर डालें तो मुंबई शाखा के डिप्टी मैनेजर ने कहा था कि उसे महा प्रबंधक ने निर्देश दिया कि नीरज के एलओयू को बिना किसी जांच-पड़ताल के पास कर दिया जाए। इस प्रकार के दबाव जब तक बैंको पर पड़ते रहेंगे, तब तक बड़े-बड़े कर्जदार पैसा दबाकर विदेश भागते रहेंगे। पीएनबी ने निजी जासूस तैनात करने की जो नीति बनायी है, उसके तहत कर्जदारों और उनसे जुड़ी जानकारियों को इकट्ठा करना है। इन एजेन्सियों को कर्जदार के खातों की भी पूरी जानकारी देनी है। बैंक की ओर से इन जासूसों को रिपोर्ट देने के लिए 60 दिन अर्थात दो महीने का समय दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर तीन महीने तक रिपोर्ट दे सकते हैं। इतनी अवधि तक बड़े कर्जदारों का कर्ज रोकना क्या बैंकों के वश की बात होगी? बैंकों के पास पहले भी यह अधिकार है कि वे कर्जदार के बारे में पूरी जानकारी जुटालें तो अब निजी जासूस कितना कर पाएंगे, यह अहम सवाल है।(हिफी)

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