स्वपनिल संसार। लखनऊ।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली को लेकर चर्चा हुई। जिसमें यह तय किया गया कि विद्यालय के शुल्क लेने की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और कोई भी स्कूल सिर्फ चार तरह से ही शुल्क ले सकेंगे। जिसमें विवरण पुस्तिका शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक शुल्क शामिल है। इसके अलावा अगर कोई सुविधा जैसे वाहन, हॉस्टल, भ्रमण, कैंटीन की सुविधा लेता है तो ही शुल्क देना होगा। हर तरह की शुल्क की रसीद देना स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा। इन नियमों के दायरे में सीबीएससी और आईसीएससी बोर्ड द्वारा संचालित विद्यालयों को भी इसमें लिया गया है।

साथ ही कोई भी स्कूल बच्चों की ड्रेस में पांच वर्ष तक परिवर्तन नहीं कर सकेगा और न ही जूते-मोजे किसी दुकान से लेने के लिए बाध्य कर सकेगा। विद्यालय में कोई भी कमर्शियल कार्य मे जो आय होगी उसे विद्यालय की आय में लिया जाएगा। सरकार के इन फैसलों से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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