साइबर क्राइम की रोकथाम और नियंत्रण के सम्बन्ध में एडवाइजरी
     लखनऊ। स्वप्निल संसार।  पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 ओ0पी0 सिंह द्वारा गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा साइबर क्राइम की रोकथाम और नियंत्रण के सम्बन्ध में जारी एडवाइजरी के क्रम में कहा कि विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों यथा वेबसाइट डिफेसमेन्ट, आॅनलाइन फाइनेन्सियल फ्राड, आॅन लाइन स्टाकिंग/हेरेसमेन्ट, डोमेन थेफ्ट/डाटा थेफ्ट, सोशल मीडिया पर आपराधिक गतिविधियाँ आदि के लिए विशिष्ट विवेचनात्मक दक्षता और फोरेन्सिक टूल की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रक्रिया में तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियों के दृष्टिगत रखते हुये एडवाइजरी के अनुरूप समस्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक प्रभारी जनपदों को निम्न निर्देश दिये गये हैंः-   उत्तर प्रदेश पुलिस के अन्तर्गत ‘राज्य साइबर क्राइम समन्वय (Coordination) सेल’ पुलिस महानिरीक्षक एस0टी0एफ0 के नेतृत्व में गठित किया गया है जिन्हें ‘राज्य साइबर क्राइम समन्वयक’ कहा जायेगा। यह सेल जनपदीय स्तर पर स्थापित साइबर क्राइम सेल के प्रशिक्षण, विवेचना में मार्ग दर्शन, एवं अन्तर्राज्यीय समन्वय के लिए उत्तरदायी होगा। 
    प्रत्येक जनपद में अपर पुलिस अधीक्षक, अपराध/पुलिस उपाधीक्षक, अपराध के नेतृत्व में ‘जनपदीय साइबर सेल’ गठित किया जायेेगा जिसमें पर्याप्त संख्या में निरीक्षक/उप-निरीक्षक तथा अन्य कर्मी नियुक्त होंगे। यह वर्तमान में गठित क्राइम ब्रांच का हिस्सा होगा तथा यह सेल जनपदीय पुलिस अधीक्षक के अधीन कार्य करेगा और राज्य साइबर समन्वय सेल से विवचेना के सम्बन्ध में निर्देश प्राप्त करेगा।
    वर्तमान समय में विचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है। इसकी व्यापकता और शीघ्रता से लोगों तक पहुँचने की क्षमता के कारण इसका दुरूपयोग धार्मिक उन्माद फैलाने, दूसरे धर्म के प्रति लोगों में द्वेष पैदा करने, व्यक्तिगत प्रतिष्ठा में ठेस पहुँचाने, अश्लील विडियो अपलोड करने और महिलाओं/युवतियों को ब्लैकमेल करने जैसे आपराधिक कृत्यों के होने से कानून व्यवस्था सम्बन्धी गम्भीर समस्यायें उत्पन्न हो जाती हैं। सामान्य रूप से इनके लिए Facebook, Twitter, WhatsApp, Youtube, Instagram, Google+ आदि सेवाओं का प्रयोग किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणी और उसकी प्रतिक्रिया की सतत् निगरानी हेतु समस्त रेंज कार्यालयों को निर्देशित किया गया है। 

    आपत्तिजनक एवं भड़काऊ Page/Profile/Post/Tweet/Video  आदि चिन्हित होने पर भारत में उनका च्नइसपब ।बब मेे तत्काल ठसवबा करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही की जाये। 
    सोशल नेटवर्किंग साइट पर   Public Access  आदि साइट्स को Block करने तथा उक्त प्रकार के कन्टेन्ट को पोस्ट/अपलोड करने वाले की जानकारी प्राप्त करने हेतु निर्देशित किया गया है।
    पीड़ित    द्वारा प्राप्त सूचना का विश्लेषण कर आई0टी0 एक्ट एवं भा0दं0वि0 की सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत कराई जायेगी। 
    विवेचना के मध्य डिजिटल साक्ष्य प्राप्त करने हेतु बरामद कम्प्यूटर, लैपटाॅप, मोबाइल, पेनड्राइव, हार्डडिस्क आदि इलेक्ट्रानिक डिवाइसों का फोरेन्सिक परीक्षण कराने हेतु सम्बन्धित विधि विज्ञान प्रयोगशाला को नियमानुसार भेजा जाये। 
    उक्त निर्देशों को भली-भाॅति अवगत कराने के लिए कार्यशालायें आयोजित की  जाये।  

Leave a Reply

Your email address will not be published.