स्वप्निल संसार। प्रोफेसर यशपाल भारतीय शिक्षाविद व वैज्ञानिक थे। उनका जन्म 26 नवंबर, 1926 को झांग (अब पाकिस्तान)(पंजाब प्रांत का शहर) में हुआ था। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से 1941में भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर तथा 1958 में मैसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी से भौतिकी में ही पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। कॉस्मिक किरणों के अध्ययन और शिक्षा संस्थानों के निर्माण में अपने योगदान के लिए प्रो. यश पाल को पहचाना जाता है।

प्रोफेसर यशपाल ने अपने कैरियर की शुरूआत बम्बई अब मुंबई स्थित टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान से शुरू किया था। 1973 में वे केंद्र सरकार द्वारा अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के पहले निदेशक नियुक्त हुए थे। वे 193 से 1984 तक योजना आयोग में मुख्य सलाहकार व 1984 से 1986 तक विज्ञान व तकनलाजी विभाग में सचिव के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। वे 1986 से1999 तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष थे। और 2007-12 तक वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। वे दूरदर्शन पर अत्यंत चर्चित विज्ञान कार्यक्रम टर्निंग प्वाईंट में भागीदारी व विज्ञान को साधारण शब्दों में आम जनता तक पहुंचाने के प्रयासों के कारण लोकप्रिय रहे थे। वे भारत की छाप टीवी के विज्ञान कार्यक्रमों के सलाहकार मंडल में भी शामिल रहे थे।
यशपाल को भारत सरकार द्वारा 1976 में विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण तथा 2013 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें 2009 में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार एवं कलिंग पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। प्रोफेसर यशपाल का निधन 24 जुलाई 2017 को उनके नोयडा स्थित आवास पर हुआ था।

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