रुडाल्फ़ फिर्खो , इनका जन्म पोरेनिया प्रदेश के शिवेल्बीन  में 13 अक्टूबर1821 में हुआ था। शिक्षा पूर्ण होने पर 1843 में ये चैरिटी अस्पताल में सहायक सर्जन, 1846 में रेक्टर तथा 1847 में युनिविर्सिटी के अध्यापक नियुक्त हुए। इसी समय इन्होंने राइनहार्ट  के सहयोग से शरीर रचना तथा क्रियाविज्ञान और विकृतिविज्ञान पर एक प्रसिद्ध प्रकाशन आरंभ किया। राइनहार्ट की मृत्यु के पश्चात् ये इसे अकेले प्रकाशित करते रहे। 1848 में टाइफ़स की महामारी के कारणों की जाँच के लिए नियुक्त कमीशन के आप सदस्य थे, किन्तु राजनीति में उग्र विचारों के कारण बर्लिन से निकाल दिए गए। तब वुर्जवर्गे मेडिकल स्कूल में इन्होंने anatomy  की शिक्षा देनी आरंभ की, जिससे इस स्कूल को बहुत लाभ हुआ। 1856 में आप बर्लिन में पुन: बुलाए गए। यहाँ Pathological Institute  के निर्देशक के पद पर आपके रहने के फलस्वरूप मौलिक अनुसंधानों की  निरंतर धारा निकलती रही।

इनके विस्तृत अध्ययनों में रोगवज्ञान संबंधी अनुसंधान प्रमुख थे। Histology, विकृत शरीर तथा विशिष्ट रोगों से संबंधित आपने महत्व की खोजे कीं। इन्होंने कोशिका विज्ञान तथा कोश-विकृति-विज्ञान की स्थापना की। 1858 में ‘सेलुलर पैथोलाजी’ आपकी प्रसिद्ध पुस्तक प्रकाशित हुई। इन्होंने महत्व की अनेक वैज्ञानिक तथा अन्य विषयक पुस्तकें भी लिखीं है।

रुडाल्फ़ फिर्खो ने मानव विज्ञान तथा प्रागैतिहासिक वास्तुकला संबंधी अनुसंधान किए तथा इन विषयों पर प्रभावशाली लेख लिखे। 1862 में आप प्रशिया की संसद के सदस्य चुने गए। यहाँ इन्होंने फोर्टश्रिट्स पार्टी की स्थापना की। कई वर्ष तक वित्त कमेटी के ये अध्यक्ष रहे तथा प्रशियन बजेट प्रणाली के प्रमुख संस्थापक थे। 1880 में इन्होंने राइखस्टैग में प्रवेश किया। यहाँ ये विरोधी दल के नेता हो गए तथा बिस्मार्क के प्रबल विरोधी थे। इन्होंने बर्लिन की नगरमहापालिका के सदस्य के रूप में 30 वर्ष तक नगर की सेवा की। इन्हीं की चेष्टाओं से वहाँ वाहित मल का फार्म, जलसंभरण तथा जल निकासी के समुचित प्रबंध हुए। इस परोपकारी वैज्ञानिक की मृत्यु 81 वर्ष की आयु में 5 सितम्बर 1902 को हुई थी।

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