स्वप्निल संसार। 19 साल की उम्र में 9 जेट गिराने वाला देश के पहले फाइटर पायलट। भारतीय वायुसेना में एक से एक जांबाज पायलट हुए हैं जिन्होंने 1962 से लेकर कारगिल युद्ध तक वीरता का प्रदर्शन किया है। 1971 में भारतीय वायुसेना की वीरता की बदौलत ही पाकिस्तान को बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी थी।आपका जन्म: 2 दिसंबर 1898 को कलकत्ता अब कोलकाता में हुआ था।
लेकिन आज़ादी से पहले भी ऐसे फाइटर पायलट हुए जिनके पराक्रम की कहानी पूरी दुनिया में मशहूर है। ब्रिटिश शासन के अधीन पहले विश्व युद्ध में लड़ने वाले पायलट थे इंद्र लाल रॉय। महज़ 2 साल के अंदर उन्होंने ब्रिटिश एयरफोर्स रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स में वो मुकाम हासिल कर लिया था, जो किसी के लिए भी एक सपना साबित हो सकता है। 2 दिसंबर 1898 को कोलकाता में जन्मे इंद्र लाल रॉय के सर्विस रिकॉर्ड के मुताबिक वो अप्रैल 1917 में रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स का हिस्सा बन चुके थे। ब्रिटिश एयरफोर्स ज्वाइन करने के दौरान उनकी उम्र महज़ 18 साल थी। लंदन के सेंट पॉल स्कूल में बढ़ते हुए ही उनकी नौकरी लग गई थी. उनकी प्रतिभा का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि उन्हें 3 महीने में ही प्रमोशन कर सेकेंड लेफ्टिनेंट बना दिया गया था। ब्रिटेन की रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स की तरफ से पहले विश्व युद्ध में लड़ते हुए इंद्र लाल रॉय ने जर्मनी वायुसेना को तहस नहस कर दिया था। लड़ाई में इंद्र ने 170 घंटे उड़ान भरी थी. इस दौरान उन्होंने महज़ 14 दिनों के अंदर 9 फाइटर प्लेन को हवा में मार गिराया था। जर्मनी से लड़ते हुए उनकी उम्र महज़ 19 साल थी।
फ्लाइंग क्रॉस पाने वाले पहले भारतीय इंद्र लाल रॉय को उनके पराक्रम और वीरता के लिए डिस्टिंगुइश्ड फ्लाइंग क्रॉस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। ये अवॉर्ड पाने वाले वो पहले भारतीय सैनिक हैं। द लंदन गैजेट में उनके बारे में लेख छपा. इस लेख में उन्हें बेहतरीन और निडर पायलट का खिताब दिया गया। उनके वीरता का ज़िक्र करते हुए लेख में बताया गया कि एक उड़ान में उन्होंने 2 दुश्मन विमानों को मार गिराया था। इंद्र उस वक्त केवल 19 बरस के थे, जब उन्होंने पहले विश्व युद्ध में बलिदान दे दिया. वे फ्रांस में वेस्टर्न फ्रंट पर 22 जुलाई 1918,को शहीद हो गए थे । उनके भतीजे सुब्रतो मुखर्जी वायु सेना के पहले इंडियन चीफ स्टाफ बने।

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