जयंती पर विशेष- मेडिकल उपकरणों में स्टेथस्कोप की अपनी खास पहचान है। इसे बच्चे तक पहचानते हैं। इसका आविष्कार करने वाले रेने थियेफल हाइसिन लाइनेक की आज जयंती है। रेने थियेफल हाइसिन लाइनेक का जन्म 17 फरवरी 1781 में फ्रांस में हुआ था। उन्होंने मेडिसीन की स्टडी अपने फिजिशन अंकल के अधीन फ्रांस के नॉन्ट शहर में की थी। फ्रांसीसी क्रांति में इन्हें मेडिकल सैनिक के तौर पर देखा जाता था। रेने थियेफल हाइसिन लाइनेक स्टूडेंट के जमाने से ही बेहद सम्मानित थे। वह प्रतिभाशाली स्टूडेंट थे। इन्होंने 1801 में पैरिस में फिर से पढ़ाई शुरू की और फ्रांसीसी राजशाही के नेके हॉस्पिटल में काम भी शुरू कर दिया।
1816 में शर्मीले स्वभाव के रेने थियेफल हाइसिन लाइनेक ने स्टेथस्कोप का आविष्कार किया। इस आविष्कार के पीछे भी एक दिलचस्प वाकया है। वह हार्ट समस्या से जूझ रही एक महिला की जांच कर रहे थे। इस तरह की जांच के वक्त डॉक्टर सामान्य रूप से मरीज के धड़कनों को सुनते हैं। एक हाथ मशीन के साथ सीने पर होता है और कान में उसका वायर लगा रहता है लेकिन रूढ़िवादी लाइनेक ने सोचा कि यह ठीक नहीं है।

वह भी तब जब महिला काफी वजन वाली थी। उन्होंने एक ट्यूब में पेपर को रोल किया और फिर उससे महिला के सीने को दबाया। इससे उन्होंने महिला की धड़कनों को सुन लिया। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने यह प्रेरणा बांसुरी से ली थी। वह बांसुरी भी बजाते थे। रेने थियेफल हाइसिन लाइनेक का यह आविष्कार फ्रांस से निकलकर धीरे-धीरे यूरोप और फिर अमेरिका तक फैल गया। 13 अगस्त 1826 को  ट्यूबरक्‍यूलोसिस के कारण रेने थियेफल हाइसिन लाइनेक की महज 45 वर्ष की उम्र में मौत हो गई. लेकिन उन्हें अपने इस महत्वपूर्ण आविष्कार के महत्व का अंदाजा अच्छी तरह से था इसलिए उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी विरासत कहा था।फोटो स्टोरी सोशल मिडिया से

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