26 फरवरी 1937 को #अलबर्टहार्समैन ने अपनी पत्नी #उर्सला की याद में उर्सला हॉर्समैन मेमोरियल अस्पताल की स्थापना की थी। अस्पताल की स्थापना में उर्सला के बेटे हेनरी हार्समैन की अहम भूमिका थी।
अल्बर्ट फ्रांसिस हॉर्समैन के बेटे अल्बर्ट हॉर्समैन #कानपुर में स्वदेशी काटन मिल की तामीर की थी। वह अपनी पत्नी उर्सला से बेपनाह मोहब्बत करते थे। जो कि बहुत ही खूबसूरत थी। उर्सला 1935 में ब्रिटिश इम्पीरियल एयरवेज के विमान हादसे का शिकार हो गई, जिसमें सफर कर रही उर्सला की मौत हो गई।
इस हादसे ने अल्बर्ट हॉर्समैन एवं उनके बेटे हेनरी हॉर्समैन को हिला कर रख दिया था।
लिहाजा उर्सला की वादों को दिल में सहेजने के लिए ही अलबर्ट हॉर्समैन ने बेटे के साथ मिलकर अस्पताल की तामीर करवाई ।
हर 26 फरवरी को उर्सला को याद किया जाता है। उनकी तस्वीर पर फूल डाले जाते हैं। पादरी साहब को बुलाया जाता है दुआ की जाती है। यह सब गैर मसीहीयों की तरफ से होता है। उर्सला हॉर्समैन मेमोरियल अस्पताल  में वर्तमान समय में 550 बेड हैं। इसके साथ ही इसकी मंडलीय चिकित्सालय के रूप में पहचान है। यह अस्पताल आज बर्न यूनिट, कार्डियक यूनिट, डायलिसिस यूनिट, फिजियोथेरेपी, आइसीयू, आइसीसीयू, एमआरआइ, सीटी स्कैन, वेंटीलेटर, पीबीयू, नियोनेटल यूनिट, सीआर्म, डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड जांच, कम्यूटराइज्ड पैथालॉजी, ब्लड बैंक, ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट एवं जीरियाटिक वार्ड आदि सुविधाओं से व्यवस्थित है।
प्यार_से_जीने_दो #नफरतहारेगी

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