‘विश्व रेडियो दिवस’ – ‘रेडियो को सक्रिय एवं जीवंत रखें’.रेडियो हमारे अकेलेपन का साथी है, जो हमेशा गीत-संगीत और रोचक कार्यक्रमों से हमें मनोरंजन देता है। यही वजह है कि निजी एफएम रेडियो चैनल्स की डिमांड बढ़ी है और उनके सुनने वालों की संख्या भी। यही कारण है कि  2008 में रेडियो इंडस्ट्री का कमाई 800 करोड़ थी, जोअब बढ़कर 2 हजार करोड़ तक पहुंच गई है। रेडियो दिन-ब-दिन अपने लिसनर्स बढ़ा रहा है। आज देश के 99 फीसदी हिस्से में रेडियो की पहुंच है और इसकी ताकत को पहचानकर ही भारतीय प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के लिए रेडियो को ही चुना।

रेडियो सिलोन से निजी एफएम चैनल तक का मनोरंजक सफर वक्त के साथ और दिलचस्प हो गया है। एक वक्त रेडियो को चालू होने में ही कई मिनट लग जाते थे, जबकि डिजिटल युग में आज मोबाइल फोन में हेडफोन को कनेक्ट करते ही एफएम का मजा लिया जा रहा है। ‘अमीन सयानी’ की आवाज और फौजी भाइयों का कार्यक्रम ‘जयमाला’, ‘हवामहल’ के सुनहरे दौर को आज ‘मन की बात’ ने फिर से लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया है।

रेडियो एक बेहद लम्बा सफर तय कर आज यहां तक पहुंचा है। इस यात्रा के दौरान इसमें तकनीकी बदलाव एनालॉग से डिजिटलीकरण तो हुआ ही, साथ ही इसकी प्रस्तुति में भी बदलाव आया। रेडियो ने अपनी शैली से नए-नए रंग बिखेरे और लोगों को खूब लुभाया। इसने महत्वपूर्ण सामरिक और सामाजिक दायित्वों को भी बखूबी निभाया। सूचनाओं के प्रसारण के साथ-साथ लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के अलावा विभिन्न मुद्दों पर चर्चाओं के माध्यम से लोगों को अपने साथ जोड़े रखा। प्राकृतिक आपदाओं में लोगों की सहायता के लिए आगे आने के लिए प्रेरित किया। सहज उपलब्धता और सस्ता होने के कारण रेडियो जन संचार का बेहतरीन माध्यम साबित हुआ जिसका समाज ने भरपूर लाभ उठाया। रेडियो को सम्मान देने के लिए यूनेस्को ने 13 फरवरी का दिन विश्व रेडियो दिवस के रूप में घोषित किया। इससे पहले साल 2008 में पहली बार स्पेन की एक रेडियो संस्था ने 30 अक्टूबर को विश्व रेडियो दिवस घोषित करने के लिए यूनेस्को से निवेदन किया। 29 सितम्बर 2011 में यूनेस्को की उच्च स्तरीय बैठक हुई और विश्व रेडियो दिवस के लिए अंतिम रूप से 13 फरवरी को चुना गया।  संयुक्त राष्ट्र में पहली बार इसी दिन 1946 में रेडियो का प्रसारण हुआ। पहला विश्व रेडियो दिवस 2012 में मनाया गया।

इंटरनेट, मोबाइल और टेक्नोलॉजी के इस दौर में रेडियो सुनने वालों की दीवानगी आज भी बरकरार है। रेडियो की इतनी प्रासंगिगता है कि आज भी 80 प्रतिशत लोग इससे जुड़े हुए हैं। हालांकि समय समय पर रेडियो के स्वरूप में बदलाव जरूर आता है, पर इसकी लोकप्रियता आज भी बरकार है।एजेन्सी 

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