संजोग वॉल्टर। अवध की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल शायद कही मिले,अवध के नवाबों और उनकी बेगमों ने मंदिर तामीर करवाए तो हिन्दू राजाओं ने रौज़े,इमामबाड़े,और मस्जिदों की तामीर करवाई,इतिहास के इन्ही पन्नों में दर्ज है “महाराजा टिकैत राय” का नाम जिनके नाम के बिना अवध की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल अधूरी रहेगी।

महाराजा टिकैत राय बहादुर (श्रीवास्तव) जो रोज मुट्ठी भर के चांदी के सिक्के दान दिया करते थे ।आयोध्या के हनुमान गढी मंदिर का निर्माण इन्ही के द्वारा समपन्न हुआ था । इन्होने अपने जीवन काल मे अनेको भव्य मंदिर, पुल तालाब कोठिया बनवायी थी ।
महाराजा टिकैत राय बहादुर ने  लखनऊ को संवारने और सुविधा संपन्न बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई । लखनऊ में सैकड़ों तालाब और बावलियों का निर्माण कराया। टिकैतगंज मुहल्ला बसाया और वहां पक्के तालाब बनवाए। यह तालाब आज भी लखनऊ की धरोहर है। शीतला मंदिर का पुनरोद्धार कर मेला प्रारंभ कराया।  बाजार स्थापित कराया, जो आज राजा बाजार के नाम से प्रसिद्ध मुहल्ला है। अवध क्षेत्र में राजा टिकैत राय जैसा समाज सेवी और दानी कायस्थ दूसरा नहीं था। राज टिकैत राय ने लखनऊ सहित अवध क्षेत्र में सौ से अधिक शिवमंदिर बनवाए। रायबरेली के डलमऊ में गंगा पर सारे घाट और मंदिर राजा टिकैत राय के बनावाए हुए ही हैं।  राजा टिकैत राय के नाम पर लखनऊ में टिकैतगंज कदीम, कण्डहा टिकैतगंज, बाराबंकी के टिकैत नगर और टिकैतगंज, रायबरेली और बदायूं में टिकैत नगर बसाए। राजा टिकैत राय के मुकुट में दो मछलियों वाला राजचिह्न अंकित था।

“महाराजा टिकैत राय ” ने पुराने लखनऊ में  मस्जिद की तामीर करवाई जिसे टिकैत राय की मस्जिद के नाम से जाना जाता है,और इस इलाके को टिकैतगंज के नाम से जाना जाता है मस्जिद और यह मोहल्ला आज भी कायम है, “महाराजा टिकैत राय ” ने लखनऊ हरदोई मार्ग पर रहमान खेडा के नजदीक बेहटा नदी के किनारे भगवान् शिव के मंदिर की स्थापना की यह साल था 1795. बेहटा नदी पर बने पुराने पुल जब जर्ज़र हो गया तो पास में एक और पुल बना दिया गया,पुराने पुल पर दो भव्य प्रवेश द्वार आज भी कायम है,यह मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित घोषित किया जा चुका है।

इसी दौरान पुराने लखनऊ के में शीतला माता के नाम पर मेहँदी गंज में मंदिर का निर्माण करवाया जहाँ आज भी होली के आठवें दिन मेला लगता है।

“महाराजा टिकैत राय ने लखनऊ में तब के भदेवा के जंगल में तालाब की तामीर करवाई,यह इलाका अब राजाजी पुरम के नाम से जाना जाता है,अब यह तालाब सिर्फ नाम भर का ही रह गया है,तालाब की ज़मीन पर कालोनी खड़ी हो गयी,इसी तालाब के करीब सरकारी कर्मचारियों की आवासीय कालोनी बनी जिसे टिकेत राय तालाब कालोनी के नाम से जाना जाता है, इस तालाब को ख़ूबसूरती देने के लिए लखनऊ के तब के सांसद अटल बिहारी बाजपेई ने यहाँ MUSICAL FOUNTEIN बनवा दिया मंशा थी की यह तालाब अच्छा लगेगा..पर अटल जी की इस कोशिश को भी भुला दिया गया।महाराजा टिकैत राय बहादुर (1760–1808 ) ने 1791- 1796 के बीच महाराजा टिकैत राय बहादुर अवध में दीवान थे आसफ-उद-दौला के शासन काल में  ।

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