पद्मजा नायडू का जन्म 17 नवम्बर, 1900 में हुआ था। उनके पिता का नाम डॉ. एम. गोविंदराजलु नायडू तथा उनकी माता का नाम  श्रीमती सरोजिनी नायडू जो कि सुप्रसिद्ध कवयित्री और भारत देश के सर्वोत्तम राष्ट्रीय नेताओं में  थीं। पद्मजा पर अपनी देशभक्त माँ का काफ़ी असर था। इन्होंने अपनी माता के समान ही अपना सारा जीवन भारत के हितों के लिए समर्पित कर दिया था। राष्ट्रीय सेवा और इसके साथ ही उनका मानवीय दृष्टिकोण हमेशा याद किया जाता है। पद्मजा नायडू को 1962 में ‘भारत सरकार’ के सर्वोच्च दूसरे नागरिक पुरस्कार ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।

मात्र 21 वर्ष की आयु में ही पद्मजा नायडू राष्ट्रीय क्षितिज पर उभर चुकी थीं। कुछ ही समय बाद वे हैदराबाद में ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ की संयुक्त संस्थापिका बनीं।
पद्मजा नायडू ने विदेशी सामानों के बहिष्कार करने और खादी को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने का संदेश दिया और समर्पित अभियान में शामिल हुईं।
 1942 में जब महात्मा गाँधी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू किया, तब उस आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा।

पद्मजा नायडू  पश्चिम बंगाल ( 1956 में बंगाल की राज्यपाल बनी) की प्रथम महिला राज्यपाल थी। । पद्मजा नायडू  ने लोगों को विदेशी सामान के बहिष्कार और खादी अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होने भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया जिसके कारण उन्हे जेल भी जाना पड़ा। 1950 में वे सांसद चुनी गई।लगभग 50 वर्ष के सार्वजनिक जीवन में पद्मजा नायडू रेडक्रास से भी जुड़ी रहीं और 1971 से 1972 तक वे इसकी अध्यक्ष भी रहीं।

पद्मजा नायडू का निधन 2 मई 1975 को हुआ था । उनके नाम पर दार्जिलिंग में ‘पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान’ है। एजेन्सी

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