परेश रावल ने अपनी फिल्म करियर में कई मशहूर भूमिकाएं निभाई हैं। उनकी वन-लाइनर्स और एक्सप्रेशन क्षमता उन्हें विशेष बनाती हैं। वे कॉमेडी के क्षेत्र में अपनी माहिरी के लिए भी प्रसिद्ध हैं और जब भी वे स्क्रीन पर आते हैं तो उनकी टाइमिंग और एक्सप्रेशन का प्रदर्शन उनके दर्शकों को काफी प्रभावित करता है।  उनकी अद्भुत कॉमिक टाइमिंग और अभिनय ने उन्हें बॉलीवुड में महानता के मुकाम तक पहुंचाया है। परेश रावल का जन्म 30 मई 1950 को  गुजराती ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

परेश रावल ने कॉमेडी के साथ-साथ खलनायकी भूमिकाओं में भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसी फिल्मों में काम किया है जहां वे नेगेटिव चरित्रों को निभाते हुए देखे गए हैं और उनकी अद्भुत अभिनय कला ने उन्हें तारीफों से नवाजा है और इसके लिए उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मानों से नवाजा गया है, जिसमें पद्मश्री सम्मान, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर अवार्ड्स मुख अवार्ड सम्मान शामिल है।

  परेश रावल ने अपनी करियर की शुरुआत इंडस्ट्री में करने से पहले बैंक ऑफ बड़ौदा में नौकरी की थी। वे बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत थे लेकिन एक्टिंग में रूचि  के चलते  उन्होंने बैंक जॉब छोड़ दी और अपनी प्रिय गतिविधि को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया।

परेश रावल की पत्नी स्वरूपा संपत उनके बॉस की बेटी थीं। उन्होंने अपनी रियल लाइफ में भी एक दिलचस्प कहानी बनाई है। परेश रावल ने स्वरूपा को पहली बार देखा और उनके दिल में मोहब्बत की चिंगारी जगी। उन्होंने  बताया है कि उन्हें जब स्वरूपा को देखा तो उन्होंने ठान ली थी कि  से उन्हें शादी करनी है।

परेश रावल ने अपने करियर की शुरुआत  1982 में गुजराती फिल्म ‘Naseeb Ni Balihari’ से की थी। परेश रावल ने 1984 में ‘होली’ नाम की फिल्म में सहायक की भूमिका निभाई थी। हिंदी के अलावा परेश रावल ने गुजराती, तेलुगु, अंग्रेजी और मराठी फिल्मों में भी काम किया हैं। उन्होंने  अंदाज़ अपना अपना, चाची 420, हेरा फेरी, आवारा पागल दीवाना, हंगामा, दीवाने हुए पागल, गरम मसाला, फिर हेरा फेरी, गोलमाल: फन अनलिमिटेड, भागम भाग, भूल भुलैया, वेलकम, ओएमजी – ओह माय गॉड!, संजू सहित तमाम हिट फिल्मों में काम किया है।

फिल्मों में काम करने के साथ साथ उन्होंने राजनीति में भी अपना हाथ आजमाया। परेश रावल ने  2014 में भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की थी। उसी साल उन्हें लोकसभा चुनाव में अहमदाबाद (पूर्व) निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का मौका भी मिला। इस चुनाव में जीतकर वो लोकसभा सांसद भी बने। 2019 के लोकसभा चुनाव में वो चुनाव नहीं लड़े। उन्होंने यह कहते हुए टिकट नहीं लिया कि वह राजनीति को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे है।

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