लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर का जन्म 3 नवंबर 1937 को लक्ष्मी पूजन के दिन हुआ था, अपने जन्म के दिन की वजह से, उनका नाम लक्ष्मी रखा गया, जो देवी लक्ष्मी के नाम पर था। उन्होंने अपने बचपन के दिन बम्बई के विले पार्ले (पूर्व) की मलिन बस्तियों में अत्यंत गरीबी के बीच बिताया। उनके पिता की मृत्यु उस समय हो थी जब वे बच्चे ही थे। अपने परिवार की खराब वित्तीय हालत के कारण वे अपने शैक्षणिक शिक्षा भी पूरी नहीं कर सके। लक्ष्मीकांत के पिता के दोस्त, जो संगीतकार थे उन्होंने लक्ष्मीकांत उनके बड़े भाई को संगीत सीखने की सलाह दी तदनुसार, लक्ष्मीकांत ने सारंगी बजाना सीखा और उनके बड़े भाई ने तबला बजाना सीखा। उन्होंने जाने-माने सारंगी खिलाड़ी हुसैन अली की सोहबत में दो साल बिताए।

लक्ष्मीकांत ने अपनी फिल्म कैरियर की शुरुआत बाल अभिनेता के रूप में हिंदी फिल्म भक्त पुंडलिक (1949) और आंखें (1950) से की। उन्होंने कुछ गुजराती फिल्मों में काम किया।
जब लक्ष्मीकांत 10 साल के थे तब उन्होंने लता मंगेशकर के कंसर्ट में जो रेडियो क्लब, कोलाबा हुआ था उसमे सारंगी बजाने का काम किया। लता जी उनसे इतना प्रभावित हुई की संगीत कार्यक्रम के बाद उन्होंने लक्ष्मीकांत से बात की थी।
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने सात बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का फ़िल्मफेयर पुरस्कार जीता।इस जोड़ी पर संगीत का ऐसा जुनून था कि मशहूर निर्माता-निर्देशक बाबू भाई मिस्त्री की क्लासिकल फ़िल्म ‘पारसमणि’ ने इनकी तक़दीर बदल कर रख दी। फिर पीछे मुड़कर देखने का मौक़ा ही नहीं मिला। लक्ष्मीकांत का  निधन 25 मई 1988 को हुआ था । एजेन्सी। फोटो सोशल मिडिया

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