स्मृति शेष। 29 मार्च, 1914 को पैदा हुए धूमल (पूरा नाम: अनंत बलवंत धूमल) एक ज़माने में थिएटर कंपनी में नौकरी किया करते थे। वहाँ उनका काम लोगों को खाना-पानी परोसना था। धीरे-धीरे उन्हें मराठी नाटकों में छोटी-मोटी भूमिकाएँ निभाने का मौका मिलने लगा। वे 1952 में पहली बार एक मराठी फ़िल्म में नज़र आए। उसके बाद उन्हें हिन्दी फिल्मों में भी काम मिलने लगा। धीरे-धीरे वे हिन्दी फिल्मों में चरित्र और हास्य अभिनेता के रूप में भली भांति स्थापित हो गए। वे लगभग तीन दशकों तक हिन्दी फिल्मों में सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने बहुत सारी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। उनका उनका जीवन ऐसे व्यक्ति की प्रेरणादायक कहानी है, जो अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन के बल पर सफलता के उच्च शिखर तक पहुंचा।
धूमल की कुछ प्रमुख हिंदी फिल्में हैं- नई दिल्ली (1956), हावड़ा ब्रिज (1958), सोने की चिड़िया (1958), मैं नशे में हूँ (1959), बॉम्बे का बाबू (1960) ,मेम दीदी (1961), साहिब बीबी और गुलाम (1962), हमराही (1963), वो कौन थी (1964), कश्मीर की कली (1964), गुमनाम (1964), देवर (1966), दो बदन (1966), लव इन टोक्यो (1966), तीन बहुरानियां (1967), आंखें (1968), हार जीत (1972), और बेनाम (1974)। (उन्होंने इनके अतिरिक्त भी बहुत सारी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन किया)।13 फरवरी 1987 को 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था । डी पी पन्त

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